देश की खबरें | अतिक्रमण रोकने के लिए नमदाफा राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों ने निगरानी तंत्र मजबूत किया

ईटानगर, 18 सितंबर अरुणाचल प्रदेश में नमदाफा राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों ने ‘‘अतिक्रमण’’ रोकने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया है।

अधिकारियों ने कहा कि नमदाफा राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य का चांगलांग जिले में 1985 वर्ग किलोमीटर संरक्षित क्षेत्र जनजाति योबिन (लिसू) के 84 परिवारों के अतिक्रमण के ‘‘गंभीर खतरे’’ का सामना कर रहा है। इस जनजाति के लोग कई दशक पहले चीन से यहां आए थे।

अधिकारियों का दावा है कि जनजाति के 270 घरों ने राष्ट्रीय उद्यान के बफर जोन में 30 वर्ग किलोमीटर इलाके में अतिक्रमण किया है।

इस संबंध में एक वन अधिकारी ने कहा कि उद्यान अधिकारियों द्वारा अतिक्रमण को रोकने के लिए किए गए प्रयासों के बावजूद, हाल के दिनों में कई नए मामले सामने आए हैं।

उप वन संरक्षक (वन्यजीव) मिलो तसर ने कहा, ‘‘हमने उद्यान के उन क्षेत्रों में अपने निगरानी तंत्र को कर्मियों की तैनाती और गश्त के लिए एक पुल का निर्माण करके मजबूत किया है, जहां अतिक्रमण की आशंका है।’’

तसर ने कहा कि इस साल फरवरी में उद्यान के 40 मील क्षेत्र के आसपास अवैध रूप से निर्मित तीन ढांचों को ध्वस्त कर दिया गया था।

उद्यान में बाघ, तेंदुआ, हिम तेंदुआ और धूमिल तेंदुआ पाए जाते हैं।

अधिकारी ने कहा कि अतिक्रमण नया नहीं है और इसके 2005-2006 में शुरू होने की सूचना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जनजाति के सदस्यों के साथ कई दौर की बैठकें कीं और पुनर्वास पैकेज के तौर पर जमीन या नकदी की पेशकश की लेकिन कोई समाधान नजर नहीं आ रहा है।

तसर ने कहा, ‘‘संशोधित पुनर्वास पैकेज के अनुसार, सरकार ने विकल्प के रूप में प्रति परिवार 15 लाख रुपये या उद्यान के बाहर जमीन की पेशकश की है।’’

बताया जाता है कि पिछले कुछ वर्षों से कई ग्रामीण उद्यान के अंदर फसली गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।

तसर ने कहा, ‘‘हम अतिक्रमण के प्रति ‘कतई बर्दाश्त नहीं’ की नीति रखते हैं और जब तक जैव विविधता वाले उक्त क्षेत्र को अवैध बसने वालों से मुक्त नहीं कर लिया जाता, तब तक अभियान जारी रहेगा।’’

उद्यान के एक अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि उद्यान के ‘बफर जोन’ के भीतर आठ ऐसे गांव हैं जो मान्यता प्राप्त हैं और सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त गांवों के साथ ही पुनर्वास वार्ता की जाएगी।

अधिकारी ने यह भी कहा कि यदि नए बसने वालों द्वारा उद्यान के भीतर बसने का कोई प्रयास किया गया तो वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनुसार सख्त कार्रवाई शुरू की जाएगी।

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