कोहिमा, सात मई नगालैंड सरकार हिंसा प्रभावित मणिपुर से 676 लोगों को रविवार को राज्य में वापस लेकर आई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि ‘ऑपरेशन कोहिमा कॉलिंग’ के तहत नगालैंड राज्य परिवहन की 13 बसों और पुलिस की चार बसों में उन्हें वापस लाया गया।
उन्होंने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर बसों के साथ असम राइफल्स के जवान, नगालैंड सशस्त्र पुलिस की दो पलटन और इंडिया रिजर्व बटालियन के जवान मौजूद थे।
ब्रिगेडियर वेद बेनीवाल, उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (उत्तर) शता लोहे और उप-मंडल अधिकारी (नागरिक) वेकु झिमी ने बचाव अभियान की निगरानी की।
अधिकारियों ने बताया कि वापस लाए गए लोग काम की तलाश में अपने परिवार के साथ मणिपुर गए थे। वापस लाए गए लोगों में इंफाल स्थित क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के 162 छात्र और चिकित्सक, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के 40 छात्र, फूड टेक्नोलॉजी कॉलेज के सात छात्र, मणिपुर विश्वविद्यालय के 19 छात्र और राष्ट्रीय खेल अकादमी के पांच लोग शामिल हैं।
वे मणिपुर से सुबह साढ़े पांच बजे चले और अपराह्न दो बजे के आसपास कोहिमा में पहले असम राइफल्स कैंप पहुंचे और बाद में लोगों को विभिन्न जिलों में उनके घरों के लिए भेज दिया गया।
रिम्स इंफाल के एक वरिष्ठ निवासी डॉक्टर वेफिजो कीहो ने कहा, “तीन मई को हिंसा शुरू होने के बाद से हम बहुत तनाव में थे। इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। हमें नहीं पता था कि घर लौटने के लिए किससे संपर्क किया जाए। वापस आकर हमने राहत की सांस ली है।”
उन्होंने कहा कि स्थिति बहुत खराब थी, लेकिन केंद्रीय बलों के आने के बाद स्थिति पर कुछ हद तक काबू पाया गया।
रिम्स के एक छात्र के पिता डॉक्टर केडुओजातुओ पुन्यु ने कहा, “माता-पिता के रूप में हम अपने बच्चों और वहां फंसे अन्य लोगों की सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित थे।”
स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के सलाहकार न्यूसिथो न्यूथे ने कहा कि पहल इसलिए नहीं की गई कि नगालैंड के लोगों को मणिपुर में किसी भी शारीरिक खतरे का सामना करना पड़ा, बल्कि इसलिए कि उनमें से कई लोग तुरंत घर लौटना चाहते थे।
उन्होंने कहा कि आंतरिक क्षेत्रों में फंसे लोगों, विशेषकर प्लाईवुड श्रमिकों को वापस लाने के लिए अभियान जारी रहेगा।
उप-मुख्यमंत्री यानथुंगो पैटन ने बचाव अभियान की सफलता के लिए असम राइफल्स और राज्य पुलिस की सराहना की।
उन्होंने कहा कि अब तक 676 लोगों को वापस लगाया गया है और मणिपुर के विभिन्न हिस्सों से अन्य 600 लोगों को वापस लाने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्य सरकार की ओर से गृह मंत्रालय संभाल रहे पैटन ने बचाव अभियान में देरी के लिए माफी भी मांगी।
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रुपिन शर्मा ने कहा कि देरी इसलिए हुई क्योंकि प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा पर अधिक थी।
उन्होंने कहा कि उन्हें विमानों से वापस लाने के प्रयास भी किए गए, लेकिन इंफाल हवाई अड्डा काफी व्यस्त था और बात नहीं बनी।
शर्मा ने वापस लाए गए लोगों से नगालैंड के लोगों के साथ मणिपुर में हुई हिंसा की घटनाओं को साझा नहीं करने का आग्रह किया ताकि नफरत को फैलने से रोका जा सके।
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