कोहिमा, 14 सितंबर नगालैंड विधानसभा ने बृहस्पतिवार को आम-सहमति से राज्य में वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2023 को लागू नहीं करने का प्रस्ताव पारित किया।
नगालैंड के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री सी एल जॉन ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि नगालैंड विधानसभा का 14वां सदन संकल्प करता है कि वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम 2023 केवल भारत के संविधान के अनुच्छेद 371 (ए) में प्रदान की गई संवैधानिक गारंटी के अधीन राज्य पर लागू होगा।
उन्होंने कहा कि संसद ने वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2023 पारित किया, जिसे केंद्र सरकार द्वारा चार अगस्त को अधिसूचित किया गया था। मंत्री ने कहा कि अधिनियम मुख्य रूप से भूमि और उसके संसाधनों (वनों) से संबंधित है।
उन्होंने कहा कि संशोधित अधिनियम में एक नया खंड अर्थात् धारा 1 (ए) (2) को शामिल किया गया है, जो मूल अधिनियम के संचालन से ऐसी वन भूमि को छूट देता है जो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के साथ 100 किलोमीटर की दूरी के भीतर स्थित है।
मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से 100 किलोमीटर की छूट वाला क्षेत्र नगालैंड राज्य के अधिकांश हिस्सों को कवर करेगा। उन्होंने कहा कि नगालैंड में अधिकांश वन भूमि का स्वामित्व आदिवासी समुदायों के पास है।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 371ए में कहा गया है कि नगाओं की धार्मिक या सामाजिक प्रथाओं, नगा प्रथागत कानून और नागरिक या आपराधिक न्याय की प्रक्रिया प्रशासन से संबंधित मामले में संसद का कोई भी अधिनियम नगालैंड पर लागू नहीं होगा, जिसमें नगा प्रथागत कानून और स्वामित्व के अनुसार निर्णय शामिल होंगे। मंत्री ने कहा कि भूमि और उसके संसाधनों का हस्तांतरण राज्य पर तब तक लागू नहीं होगा जब तक कि इसकी विधानसभा एक प्रस्ताव द्वारा ऐसा निर्णय नहीं लेती।
विधानसभा अध्यक्ष शेरिंगेन लोबगकुमेर ने प्रस्ताव को मतदान के लिए रखा और इसे सदन ने आम-सहमति से पारित कर दिया
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