नयी दिल्ली, दो फरवरी विष विज्ञान के विशेषज्ञों सहित एम्स दिल्ली के विशेषज्ञों की पांच सदस्यीय टीम ने जम्मू कश्मीर के राजौरी जिले में रहस्यमय बीमारी का इलाज करा रहे 11 मरीजों से मुलाकात की। इस रहस्यमय बीमारी से 17 लोगों की मौत हो चुकी है।
टीम रविवार को बधाल गांव का दौरा करेगी जहां बीमारी के कारण लोगों की मौत हुई थी तथा सील किए गए घरों और आसपास के इलाकों से नमूने एकत्र करेगी।
इस संबंध में एक सूत्र ने कहा, ‘‘नमूनों की जांच की जाएगी। विशेषज्ञ अन्य ग्रामीणों से भी बातचीत करेंगे।’’
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास की अध्यक्षता वाली टीम में ‘क्लिनिकल टॉक्सिकोलॉजी’ के प्रोफेसर डॉ. ए. शरीफ, एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. शैलेन्द्र कुमार, इमरजेंसी मेडिसिन के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. जमाहेद नायर, बाल रोग विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. जगदीश प्रसाद मीना और क्लिनिकल टॉक्सिकोलॉजी के सहायक प्रोफेसर डॉ. जावेद कादरी शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, टीम शुक्रवार रात राजौरी पहुंची और सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में मरीजों तथा उनके रिश्तेदारों से बातचीत की और पूरे प्रकरण के बारे में कई सवाल पूछे।
टीम ने कुछ ऐसे मरीजों की भी जांच की जो निगरानी में हैं। सूत्रों ने बताया कि जीएमसी राजौरी के डॉक्टर विष रोधी दवा एट्रोपिन का इस्तेमाल कर 11 मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
एम्स दिल्ली की टीम के अलावा पीजीआई चंडीगढ़ के विशेषज्ञों की एक टीम भी विषाक्तता के कारण की जांच कर रही है।
इस बीच, अधिकारियों ने बताया कि बधाल गांव में पिछले नौ दिनों में कोई नया मामला सामने नहीं आया है। गांव में सात दिसंबर से 19 जनवरी के बीच तीन परिवारों के 17 लोगों की अज्ञात कारणों से मौत हो गई थी।
लोगों को सुरक्षित करने के लिए 87 परिवारों के 364 व्यक्तियों को गांव से राजौरी के तीन पृथक केंद्रों - सरकारी नर्सिंग कॉलेज, सरकारी बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और सरकारी मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित कर दिया गया है।
सूत्रों ने बताया कि बधाल में शेष 808 परिवारों, जिनमें 3,700 लोग शामिल हैं, की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गांव को 14 समूहों में विभाजित किया गया है और उनकी निगरानी 182 अधिकारियों की टीम कर रही हैं।
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