नयी दिल्ली, 12 मई भाजपा सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने शुक्रवार को कहा कि पिछले साल महाराष्ट्र में हुई राजनीतिक उथल-पुथल पर उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का जीत का दावा ''डूबते को तिनके का सहारा'' जैसा है।
राज्यसभा सदस्य ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उच्चतम न्यायालय ने वास्तव में उद्धव ठाकरे के इस्तीफे के बाद शपथ लेने वाली भाजपा-शिवसेना सरकार को एक "संवैधानिक जामा" प्रदान किया है। ठाकरे की पार्टी के अधिकतर विधायकों ने एकनाथ शिंदे के प्रति अपनी निष्ठा जताई थी।
शिवसेना के शिंदे गुट को बाद में निर्वाचन आयोग द्वारा असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी गई थी क्योंकि पार्टी के विधानसभा और संसद सदस्यों में से अधिकतर ने शिंदे गुट को ही समर्थन दिया था।
जेठमलानी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को अपने फैसले में याचिकाकर्ताओं की सात याचिकाओं में से पांच को खारिज कर दिया और केवल दो को ही मंजूर किया।
ठाकरे से बहुमत साबित करने के वास्ते शक्ति परीक्षण के लिए कहे जाने के तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के फैसले को अदालत द्वारा खारिज किए जाने का उल्लेख करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि यह महा विकास अघाड़ी (कांग्रेस, राकांपा और शिवसेना के उद्धव गुट) के लिए एक "खोखली और अप्रासंगिक जीत" है जिसका कोई "व्यावहारिक" प्रभाव नहीं है क्योंकि न्यायाधीशों ने अपने सर्वसम्मत फैसले में शिंदे के शपथग्रहण को भी बरकरार रखा है।
जेठमलानी ने, हालांकि, कहा कि वह फैसले के इस पहलू से सहमत नहीं हैं, लेकिन यह कहकर इसे ठीक ठहराया कि शीर्ष अदालत सही है क्योंकि उसका फैसला अंतिम है।
उन्होंने कहा कि न्यायालय ने विधानसभा अध्यक्ष से केवल भरत गोगावाले को शिवसेना के मुख्य सचेतक के रूप में मान्यता देने के मामले पर फिर से विचार करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि गोगावले को इस पद पर फिर से नियुक्त किया जा सकता है।
राज्यसभा सदस्य ने कहा कि ठाकरे से बगावत करने वाले और शिंदे का समर्थन करने वाले विधायकों की अयोग्यता के मुद्दे सहित मामले पर अध्यक्ष फैसला करेंगे।
महा विकास अघाड़ी के जीत के दावे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि हार के चलते उनकी स्थिति ‘डूबते को तिनके का सहारा’ जैसी है।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने नैतिक जीत का दावा करने पर ठाकरे और उनके सहयोगियों की भी आलोचना की और कहा कि इस मुद्दे की नैतिकता पूर्वकल्पित थी क्योंकि यह पूर्व मुख्यमंत्री थे जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्मे के कारण जीतने के बाद भाजपा से अपनी पार्टी का चुनाव पूर्व गठबंधन तोड़ा था।
जेठमलानी ने कहा कि ठाकरे ने मुख्यमंत्री बनने के लिए ऐसा किया और उन्होंने लोगों की भावनाओं के साथ विश्वासघात किया, जो लोकतंत्र में सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र के राजनीतिक विवाद और दिल्ली सरकार की शक्तियों पर उच्चतम न्यायालय के फैसलों को भाजपा के लिए कानूनी, नैतिक और राजनीतिक तमाचा करार दिया था।
उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा था कि वह ठाकरे की अगुवाई वाली एमवीए सरकार को बहाल नहीं कर सकता क्योंकि उन्होंने पिछले साल जून में शक्ति परीक्षण का सामना किए बिना इस्तीफा दे दिया था।
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