नयी दिल्ली, 12 जनवरी उत्तर प्रदेश बिजली नियामक आयोग (यूपीईआरसी) ने दो बिजली वितरण कंपनियों को बिजली मीटर बदलने में खराब प्रगति के लिए कड़ी फटकार लगाई है।
ये बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) और मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (एमवीवीएनएल) हैं।
आयोग का मानना है कि ये डिस्कॉम कुछ ‘क्षुद्र हितों या गलत इरादों’ के कारण समूह आवासीय सोसायटी में ‘एकल प्वाइंट’ मीटर कनेक्शन को ‘मल्टी प्वाइंट’ कनेक्शन में बदलने के लिए पूरा प्रयास नहीं कर रही हैं।
बहुमंजिली इमारतों में जहां ‘एकल प्वाइंट’ मीटर कनेक्शन में बिजली वितरण का जिम्मा और खपत के आधार पर बिल संग्रह का काम सोसाइटी संभालती है, वहीं ‘मल्टी प्वाइंट’ मीटर कनेक्शन में प्रत्येक आवंटियों को अलग ‘कनेक्शन’ मिलता है और वह स्वयं खपत के हिसाब से बिल जमा करते हैं।
यूपीईआरसी ने 20 दिसंबर, 2022 के अपने ताजा आदेश में कहा, ‘‘लाइसेंसधारकों के साथ अत्यधिक धैर्य भरा व्यवहार करने के बाद, आयोग के पास यह निष्कर्ष निकालने के अलावा कोई विकल्प नहीं है कि लाइसेंसधारी जानबूझकर क्षुद्र हितों या गलत इरादों के कारण आयोग के निर्देशों की अवहेलना कर रहे हैं।’’
आयोग ने हाल में इस आदेश को अपनी वेबसाइट पर डाला है।
आदेश में कहा गया है, ‘‘कई मौकों पर लाइसेंसधारकों के इस रवैये के बाद आयोग को अपना रुख सख्त करने के लिए मजबूर होना पड़ा।’’
आयोग ने 10 अगस्त, 2018 को बिजली संहिता 2005 में 13वां संशोधन जारी करते हुए डिस्कॉम से कहा था कि सभी नयी बहु-मंजिला इमारतों में ‘मल्टी प्वाइंट’ कनेक्शन की सुविधा होगी, जबकि ऐसी मौजूदा इमारतों को तीन मार्च, 2019 तक ‘सिंगल-प्वाइंट’ कनेक्शन में बदला जाएगा।
पीवीवीएनएल ने 12 दिसंबर, 2022 को आयोग को बताया कि 1,39,920 फ्लैट मालिकों, जिन्होंने परिवर्तन का विकल्प चुना था, उनमें से केवल 13,472 फ्लैटों को नया कनेक्शन मिला, जबकि 12,752 फ्लैटों में काम चल रहा है।
इस संबंध में पीवीवीएनएल के प्रबंध निदेशक अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने इस संबंध में पूछे गये सवालों का जवाब नहीं दिया।
एमवीवीएनएल के प्रबंध निदेशक भवानी सिंह खंगरोट ने कहा कि 20 दिसंबर, 2022 को आयोग के आदेश के बाद से उनके अधिकारियों ने दिन-रात काम किया। उन्होंने कहा, ‘‘हम आयोग के आदेश का अक्षरशः पालन कर रहे हैं।’’
यूपीईआरसी के सूत्रों ने कहा कि आयोग को बिल्डरों और डिस्कॉम के बीच मिलीभगत का संदेह है।
इस आदेश के बारे में पूछने पर यूपीईआरसी के अध्यक्ष राज प्रताप सिंह ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
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