खरगोन (मप्र), 26 अप्रैल मध्यप्रदेश की खरगोन जिले की पुलिस ने एक विवादित वीडियो सामने आने के बाद अज्ञात लोगों के खिलाफ एक धर्म विशेष के प्रति वैमनस्यता फैलाने का मामला दर्ज किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में ट्रक पर लगे डीजे पर कथित तौर पर एक समुदाय के सदस्यों पर मध्यप्रदेश के खरगोन शहर में हाल ही में हिंसा फैलाने का आरोप लगाते हुए उनका सामाजिक बहिष्कार करने और उनसे सामान न खरीदने का आह्वान किया गया।
इसी बीच, खरगोन शहर में 10 अप्रैल को रामनवमी के जुलूस के दौरान भड़की सांप्रदायिक हिंसा के बाद जिला प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर विभिन्न स्थानों पर 121 सीसीटीवी कैमरे लगाने शुरू कर दिए हैं। कैमरों को उस इलाके में भी लगाया जा रहा है जहां कथित रूप से पथराव की घटनाएं हुई थीं।
वहीं, स्थानीय प्रशासन ने मंगलवार को लगातार चौथे दिन खरगोन में सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक नौ घंटे के लिए कर्फ्यू में ढील दी और आज से कर्फ्यू में छूट की अवधि के दौरान निजी यात्री बसों का संचालन भी शुरू कर दिया गया।
खरगोन शहर में 10 अप्रैल को रामनवमी के जुलूस पर कथित पथराव के बाद आगजनी की घटनाएं हुई थीं, जिसमें दुकानों, घरों एवं वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया था। इसके बाद पूरे शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया था। 14 अप्रैल से स्थानीय प्रशासन कुछ घंटों के लिए कर्फ्यू में ढील दे रहा है।
पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी ने बताया, ‘‘वायरल वीडियो की जानकारी मिली है। करही पुलिस थाने में सोमवार रात को अज्ञात लोगों के खिलाफ धर्म विशेष के प्रति वैनमस्यता फैलाने का प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।’’
करही पुलिस थाना प्रभारी परमानंद गोयल ने कहा कि यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए के तहत दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस को सोमवार रात को वीडियो के बारे में पता चला। उन्होंने कहा कि इसकी जांच की जा रही है और मामले में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है।
गोयल ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वीडियो में कथित तौर पर सुनी गई घोषणा 19 अप्रैल को खरगोन जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित कतरगांव में की गई थी।
इस वीडियो में उद्घोषक हिंदुओं से कथित तौर पर अनुरोध कर रहा है कि वे खरगोन शहर में रामनवमी जुलूस के दौरान पथराव करने एवं हिंदुओं के घरों को जलाने वाले ‘‘अधर्मी’’ और ‘‘पाखंडी’’ दुकानदारों का बहिष्कार करें और उनसे सामान न खरीद कर उन्हें करारा जवाब दें।
इसी तरह के एक अन्य वीडियो में भी महिलाओं के एक समूह द्वारा संकल्प लिया जा रहा है कि वे ‘‘विधर्मियों’’ की दुकानों से कपड़ा, चप्पल या अन्य कोई भी वस्तु नहीं खरीदेंगी और ना ही उन्हें अपनी कोई भी वस्तु बेचेंगी।
इस बारे में पूछे जाने पर सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट मिलिंद ढोके ने ‘पीटीआई-’ को बताया कि प्रशासन वीडियो क्लिप की जांच कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘वीडियो स्पष्ट नहीं है। मामले की जांच के बाद आगे कानूनी कदम उठाए जाएंगे।’’
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