देश की खबरें | पीड़िता के प्रति ईमानदार और संवेदनशील होना सबसे महत्वपूर्ण: मनोज बाजपेयी

(शुभा दुबे)

नयी दिल्ली, 12 मई अभिनेता मनोज बाजपेयी ने अपनी आगामी फिल्म 'सिर्फ एक बंदा काफी है' को लेकर कहा कि सच्ची घटना पर आधारित अदालती कथानक पर (फिल्म के) निर्माण के दौरान पीड़ित के प्रति संवेदनशील रहना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी।

अभिनेता ने इस फिल्म में एक अधिवक्ता का किरदार निभाया है जो नाबालिग के यौन उत्पीड़न के आरोपी प्रभावशाली बाबा के खिलाफ लड़ाई लड़ता है।

फिल्म के निर्माताओं को स्वयंभू बाबा आसाराम और 'संत श्री आसारामजी आश्रम चैरिटेबल ट्रस्ट' द्वारा कानूनी नोटिस भेजा गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि फिल्म का ट्रेलर 'अत्यधिक आपत्तिजनक और मानहानिकारक' है।

आसाराम को एक नाबालिग लड़की के यौन शोषण करने के अपराध में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।

कानूनी नोटिस के बारे में पूछे जाने पर बाजपेयी ने कहा कि वह इस मुद्दे पर टिप्पणी करने के लिए सही व्यक्ति नहीं हैं।

हालांकि अभिनेता ने कहा कि अपूर्व सिंह कार्की द्वारा निर्देशित और दीपक किंगरानी द्वारा लिखित फिल्म केवल 'सिर्फ एक कहानी' पर आधारित नहीं है।

मनोज बाजपेयी ने पीटीआई- को दिए विशेष साक्षात्कार में कहा, ‘‘यह मामला पहले से ही सार्वजनिक पटल पर है और इस संबंध में फैसला आ चुका है। हमें उन सभी घटनाओं को लेकर ईमानदार रहना होगा जो घटित हुई हैं। हमारी फिल्म में भी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमने पीड़िता को कैसे दर्शाया है।’’

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