नयी दिल्ली, 14 नवंबर कोविड-19 से संक्रमित जिन रोगियों को उपचार के दौरान एंटीवायरल दवा पैक्सलोविड दी गई, उनमें से 20 प्रतिशत रोगी शुरुआती जांच में संक्रमणमुक्त पाये जाने के बाद फिर से संक्रमित मिले। एक नये अध्ययन में यह दावा किया गया है।
अध्ययन में यह भी कहा गया कि ऐसे लोगों के शरीर में जीवित और संभावित रूप से संक्रामक वायरस भी पाए गए, जो दूसरों को बीमार कर सकते थे।
इसमें पाया गया है कि पैक्सलोविड दवा लेने के बाद शुरू में रोगी स्वस्थ लगते हैं, लेकिन बाद में वायरस का प्रभाव उन्हें फिर से संक्रमित कर देता है।
अमेरिका के बोस्टन स्थित मास जनरल ब्रिघम अस्पताल के अनुसंधानकर्ताओं ने पता लगाया कि पैक्सलोविड दवा नहीं लेने वाले लोगों को वायरस से फिर से संक्रमित होने का सामना केवल दो प्रतिशत मामलों में करना पड़ा।
पैक्सलोविड एक निरमेट्रेलविर-रिटोनाविर थेरेपी है, जिसमें दवाई का मुंह से सेवन किया जाता है। पहले के अध्ययनों में यह दवा गंभीर रूप से संक्रमित कोविड-19 रोगियों के अस्पताल में भर्ती होने और उनकी मृत्यु के मामलों को कम करने में प्रभावी पाई गई थी।
अध्ययनकर्ता मार्क सीडनर ने कहा, ‘‘हमने पैक्सलोविड और कोविड-19 के उपचार में वायरस से फिर से संक्रमित होने का अध्ययन किया।’’
अनुसंधानकर्ताओं ने अध्ययन के लिए मार्च 2022 से मई 2023 के बीच कोविड-19 की जांच की ‘पॉजिटिव’ रिपोर्ट, दवाओं के परामर्श आदि के आधार पर 142 लोगों को चुना।
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