देश की खबरें | केरल पुलिस कानून में प्रस्तावित संशोधन पर मिश्रित प्रतिक्रिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर हमलों को रोकने के लिए पुलिस कानून में संशोधन के केरल सरकार के फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कुछ विशेषज्ञों ने जहां इसका स्वागत किया है, वहीं कुछ ने आगाह किया है कि यदि संशोधन का मसौदा स्पष्ट रूप से तैयार नहीं किया गया तो नए कानून का अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

तिरुवनंतपुरम, 22 अक्टूबर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर हमलों को रोकने के लिए पुलिस कानून में संशोधन के केरल सरकार के फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कुछ विशेषज्ञों ने जहां इसका स्वागत किया है, वहीं कुछ ने आगाह किया है कि यदि संशोधन का मसौदा स्पष्ट रूप से तैयार नहीं किया गया तो नए कानून का अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

राज्य मंत्रिमंडल ने बुधवार को अतिरिक्त प्रावधान-धारा 118 ए जोड़ने की सिफारिश कर कानून को और अधिक मजबूत बनाने का फैसला किया था।

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संशोधन में ऐसे लोगों को पांच साल तक की कैद या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजाएं एक साथ हो सकती हैं जो संचार के किसी भी माध्यम से किसी व्यक्ति को डराने, अपमानित करने या मानहानि करने के इरादे से कोई सामग्री प्रकाशित, प्रचारित अथवा प्रसारित करेंगे।

केरल महिला आयोग की प्रमुख एम सी जोसेफाइन ने फैसले का स्वागत किया है।

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उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘सोशल मीडिया के जरिए साइबर हमलों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए कानून में संशोधन के राज्य सरकार के निर्णय का हम स्वागत करते हैं।’’

जोसेफाइन ने कहा कि महिला समुदाय को सर्वाधिक साइबर हमलों का सामना करना पड़ता है और इन दिनों शिकायतों में वृद्धि हो रही है।

केरल उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी केमल पाशा ने कहा कि हालांकि वह प्रस्तावित संशोधन के ब्योरे से अवगत नहीं हैं, फिर भी उन्हें लगता है कि यह अत्यावश्यक था।

उन्होंने पीटीआई- से कहा, ‘‘मुझे लगता है कि संशोधन अत्यावश्यक था क्योंकि सोशल मीडिया के जरिए ऐसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।’’

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