देश की खबरें | भाजपा शासित मध्यप्रदेश में ‘भारत बंद’ का मिला जुला असर

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भाजपा शासित मध्यप्रदेश में किसान संगठनों द्वारा बुलाये गये तथा कांग्रेस व अन्य संगठनों द्वारा समर्थित भारत बंद का मंगलवार को मिला जुला असर रहा। इस दौरान प्रदेश में छिटपुट विरोध प्रदर्शन भी हुए।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

भोपाल, आठ दिसंबर भाजपा शासित मध्यप्रदेश में किसान संगठनों द्वारा बुलाये गये तथा कांग्रेस व अन्य संगठनों द्वारा समर्थित भारत बंद का मंगलवार को मिला जुला असर रहा। इस दौरान प्रदेश में छिटपुट विरोध प्रदर्शन भी हुए।

ग्वालियर जिले में एक कांग्रेस नेता के नेतृत्व में आंदोलनकारियों को खदेड़ने के लिये पुलिस ने पानी की बौछार का इस्तेमाल किया।

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कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दुकानदारों से दुकानें बंद करने की अपील करने के साथ कई शहरों में रैली निकाली। शहरों में दुकानें हालांकि आम तौर पर खुली रहीं।

केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के लोकसभा क्षेत्र मुरैना में बंद का मिला जुला असर देखा गया। यहां किसान अपनी उपज बेचने के लिये कृषि उपज मंडी तक नहीं पहुंच सके।

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भोपाल सहित प्रदेश के कई हिस्सों में मंडियों का कामकाज प्रभावित रहा क्योंकि किसान अपनी उपज बेचने के लिये बाजार परिसर तक पहुंचने में असफल रहे। भोपाल में सब्जी मंडी में हालांकि सामान्य दिनों की तरह कामकाज हुआ।

आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ताओं ने तोमर के निवास के बाहर धरना प्रदर्शन किया। पुलिस ने इस संबंध में 50 लोगों को हिरासत में लिया है।

राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के बैनर तले भोपाल में किसानों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शासकीय आवास तक एक मार्च निकालने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने इसे चूनाभट्टी इलाके में ही रोक दिया।

भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरुण यादव और जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कैलाश मिश्रा के नेतृत्व में न्यू मार्केट इलाके में विरोध प्रदर्शन किया।

मिश्रा ने दावा किया कि बंद के तहत पुराने भोपाल में अधिकांश बाजार बंद रहे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विभिन्न इलाकों में दुकानदारों से दुकानें बंद करने का आग्रह किया।

भोपाल में हालांकि ज्यादातर दुकानें खुली रहीं।

यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ठंड में दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों से मिलना चाहिये और किसानों की समस्याओं का समाधान करना चाहिये।

उन्होंने कहा, ‘‘केन्द्र को किसान विरोधी तीन नए कानूनों को वापस लेना चाहिये। कांग्रेस किसानों के साथ है।’’

इन्दौर में राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर के छावनी क्षेत्र स्थित संयोगितागंज अनाज मंडी में नये कृषि कानूनों पर विरोध जताते हुए मोदी सरकार और केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ नारे लगाए।

इस मौके पर सिंह ने कहा, “नोटबन्दी और जीएसटी लाने के बाद अब मोदी सरकार ने केवल बड़े-बड़े लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए कृषि क्षेत्र के काले कानून पेश किए हैं। इनके खिलाफ किसानों के साथ ही कृषि उपज मंडियों के हम्माल और तुलावटी सड़क पर हैं।”

उन्होंने मंडी परिसर में किसानों, हम्मालों और तुलावटियों से नये कृषि कानूनों को लेकर चर्चा भी की।

ग्वालियर जिले के डबरा से कांग्रेस विधायक सुरेश राजे ने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया और केन्द्र सरकार का पुतला जलाया। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछार छोड़ कर उन्हें खदेड़ दिया।

प्रदेश के श्योपुर, नरसिंहपुर, टीकमगढ़, विदिशा, राजगढ़, रीवा, भिंड, शहडोल, होशंगाबाद और अन्य जिलों में भी बंद का मिला जुला असर रहा। कई स्थानों पर कांग्रेस और किसानों द्वारा विरोध प्रदर्शन भी किये गये।

प्रदेश के गुना, बड़वानी, मंदसौर, झाबुआ, उमरिया और कुछ अन्य जिलों में बाजार खुले रहे।

इससे पहले, सुबह को होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन किया गया। क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन (केकेएमएस) के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग की।

प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने ‘पीटीआई-’ को बताया कि मध्यप्रदेश में बंद का कोई प्रभाव नहीं रहा। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस ने किसानों को गुमराह करने का असफल प्रयास किया। सत्ता में रहने के दौरान कांग्रेस कृषि सुधारों का समर्थन करती थी लेकिन विपक्ष में रहते हुए उसने अपना रुख बदल दिया। इससे कांग्रेस का दोहरा मापदंड उजागर होता है।’’

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