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जरुरी जानकारी | सीपीओ, पामोलीन में मामूली सुधार

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जरुरी जानकारी | सीपीओ, पामोलीन में मामूली सुधार

नयी दिल्ली, 23 नवंबर विदेशी बाजारों में तेजी के रुख के बीच कच्चा पामतेल और पामोलीन का आयात खुला होने के कारण दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को सीपीओ और पामोलीन तेल के दाम में मामूली सुधार आया। कम आपूर्ति के कारण थोक और खुदरा बाजार में सोयाबीन और सूरजमुखी तेल आयात भाव के मुकाबले कहीं ऊंचे दाम पर बिक रहे हैं।

हल्के (सॉफ्ट) तेल की कमी की वजह से सोयाबीन दिल्ली, इंदौर और बिनौला तेल कीमतों में भी सुधार आया। बाकी तेल तिलहन अपरिवर्तित रुख के साथ बंद हुए।

बाजार सूत्रों ने कहा कि खुदरा और थोक बाजार में सूरजमुखी और सोयाबीन तेल आयात भाव के मुकाबले भारी अंतर से महंगे बिक रहे हैं। सूरजमुखी तेल का भाव लगभग 25 प्रतिशत ऊंचे में मिल रहा है जबकि सोयाबीन तेल लगभग 10 प्रतिशत ऊंचा बिक रहा है। जबकि विदेशी बाजारों में सूरजमुखी तेल, सोयाबीन तेल से 35 डॉलर प्रति टन नीचे हो गया है।

सूरजमुखी तेल में तेजी का कारण इसके स्थानीय उत्पादन का नहीं होना और कोटा प्रणाली की वजह से आयात पर्याप्त मात्रा में नहीं होना है। इसी कम तेल आपूर्ति के कारण सोयाबीन तेल भी लगभग 10 प्रतिशत महंगा बिक रहा है।

सूत्रों ने कहा कि देश के प्रमुख तेल संगठनों का काम सरकार को सिर्फ आयात के आंकड़े बताना नहीं बल्कि उन्हें यह भी बताना चाहिये कि ‘कोटा प्रणाली’ की वजह से कम आपूर्ति की स्थिति पैदा हुई है और इस कोटा प्रणाली से तेल उद्योग, किसान और उपभोक्ताओं में किसी को भी फायदा नहीं है।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग किसी निजी हित की वजह से वायदा कारोबार खोलने की पैरवी कर रहे हैं जबकि तेल तिलहन में इसी वायदा कारोबार से तेल उद्योग और किसान बर्बाद हुए हैं इसलिए इस वायदा कारोबार पर रोक को स्थायी बनाने की आवश्यकता है। बड़े तेल संगठनों की चुप्पी को देखते हुए अब राज्यों के छोटे तेल संगठन अपनी आवाज बुलंद करते हुए ‘कोटा प्रणाली’ को खत्म करने की मांग कर रहे है।

सूत्रों ने कहा कि खाद्य तेलों के आयात पर देश की निर्भरता कम करने के लिए सरसों, सोयाबीन, बिनौला, सूरजमुखी और मूंगफली (सारे सॉफ्ट आयल) के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। अगर आयातित तेलों पर निर्भरता बढ़ी और देशी तिलहन का उत्पादन नहीं बढ़ा तो पशु चारा कहां से आयेगा जबकि मवेशियों की संख्या हर साल बढ़ जाती है।

बुधवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 7,325-7,375 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,585-6,645 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,100 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,445-2,705 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 14,900 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,255-2,385 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,315-2,440 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 14,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,880 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 12,750 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,800 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 12,500 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,400 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 9,450 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,650-5,750 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज 5,460-5,510 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का) 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

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(The above story first appeared on LatestLY on Nov 23, 2022 06:36 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).