देश की खबरें | गृह मंत्रालय ने नया 'आदर्श कारागार अधिनियम' तैयार किया

नयी दिल्ली, 12 मई केंद्र ने मौजूदा कानून की कमियों को दूर करने और सुधार तथा कैदियों के पुनर्वास पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के लिए एक नया 'आदर्श कारागार अधिनियम 2023' तैयार किया है जो आजादी से पहले के 130 साल पुराने कानून की जगह लेगा।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि आदर्श अधिनियम की मुख्य विशेषताओं में जेलों में प्रतिबंधित वस्तुओं जैसे मोबाइल फोन आदि का प्रयोग करने वाले बंदियों एवं जेल कर्मचारियों के लिए दण्ड का प्रावधान है।

इसमें कहा गया कि नए अधिनियम में कैदियों को कानूनी सहायता प्रदान करने, अच्‍छे आचरण को बढ़ावा देने के लिए ‘पैरोल’, ‘फर्लो’ और समय से पहले रिहाई आदि के लिए भी प्रावधान हैं।

बयान में कहा गया कि देश में जेल और उनमें हिरासत में रखे गए व्यक्ति राज्य का विषय हैं तथा इस संदर्भ में मौजूदा कानून, 1894 का जेल अधिनियम आजादी से पहले का कानून है और लगभग 130 साल पुराना है।

इसमें कहा गया कि पिछले कुछ वर्षों में, गृह मंत्रालय ने देखा है कि मौजूदा कारागार अधिनियम में सुधारोन्मुखी प्रावधानों के अभाव के अलावा कई खामियां हैं। मंत्रालय ने कहा कि आधुनिक समय की जरूरतों और जेल प्रबंधन की आवश्यकताओं के अनुरूप अधिनियम को संशोधित एवं अद्यतन करने की आवश्यकता महसूस की गई।

इसमें कहा गया, "(मौजूदा) अधिनियम मुख्य रूप से अपराधियों को हिरासत में रखने और जेलों में अनुशासन और व्यवस्था को लागू करने पर केंद्रित है। मौजूदा अधिनियम में कैदियों के सुधार और पुनर्वास के लिए कोई प्रावधान नहीं है।"

गृह मंत्रालय ने कहा कि व्यापक 'आदर्श कारागार अधिनियम, 2023' को समग्र रूप से मार्गदर्शन प्रदान करने और मौजूदा जेल कानून की खामियों को दूर करने तथा जेल प्रबंधन में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल आदि के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

इसने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्णायक मार्गदर्शन में, समकालीन आधुनिक समय की जरूरतों और सुधारवादी विचारधारा के अनुरूप, औपनिवेशिक काल के पुराने जेल अधिनियम की समीक्षा और संशोधन करने का निर्णय लिया गया।’’

गृह मंत्रालय द्वारा 'कारागार अधिनियम, 1894' के साथ ही 'कैदी अधिनियम, 1900' और 'कैदियों का स्थानांतरण अधिनियम, 1950' की भी समीक्षा की गई है और इन अधिनियमों के प्रासंगिक प्रावधानों को 'आदर्श कारागार अधिनियम, 2023' में शामिल किया गया है।

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