देश की खबरें | स्वास्थ्य मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में संवेदनशील समूहों को भी शामिल करने का अनुरोध किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. स्वास्थ्य मंत्रालय ने मादक पदार्थों के आदी लोगों, समलैंगिकों और एचआईवी/एड्स पीड़ित व्यक्तियों सहित संवेदनशील समूहों को भी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा चलाई जा रहीं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल करने का अनुरोध किया है।
नयी दिल्ली, 28 मई स्वास्थ्य मंत्रालय ने मादक पदार्थों के आदी लोगों, समलैंगिकों और एचआईवी/एड्स पीड़ित व्यक्तियों सहित संवेदनशील समूहों को भी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा चलाई जा रहीं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल करने का अनुरोध किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि वे कोरोना वायरस लॉकडाउन के चलते अपनी आजीविका और आश्रय के लिये संघर्ष कर रहे हैं।
Also Read | कोरोना से जंग जारी: पीएसए राघवन बोले-भारत में 30 समूह कोरोना वायरस का टीका बनाने की कोशिश में लगे हैं. अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय को नागरिक समाज से संबंधित संगठनों और मादक पदार्थों के आदी लोगों, समलैंगिक समुदाय, महिला यौनकर्मियों और एचआईवी/एड्स पीड़ित लोगों की ओर से प्रतिवेदन मिले हैं कि वे वे आजीविका, पोषण, आश्रय और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच के मामले में ''बहुत प्रभावित'' हुए हैं। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (एनएसीओ) की उप महानिदेशक डॉ शोभिनी राजन ने सामाजिक न्याय मंत्रालय को लिखे एक पत्र में कहा, ''स्वास्थ्य मंत्रालय गहनता से कोविड-19 से निपटने में जुटा है। उसने उन लोगों के लिये सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित को लेकर कदम उठाए हैं, जिन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत है।''
Also Read | कोरोना के असम में 25 नए मामले दर्ज किए गए : 28 मई 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE. पत्र में कहा गया है, ''स्वास्थ्य मंत्रालय एचआईवी और अन्य प्रभावित लोगों को उपचार के संदर्भ में दवाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान कर रहा है, लेकिन इन लोगों के लिए आजीविका, पोषण और आश्रय आदि से संबंधित कोई भी सामाजिक सुरक्षा योजना नहीं है।'' सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव को संबोधित करते हुए लिखे गए इस पत्र में कहा गया है, ''अनुरोध किया जाता है कि आप इस मामले पर विचार करें और संवेदनशील आबादी तथा एड्स / एचआईवी से पीड़ित लोगों को आपके मंत्रालय द्वारा समर्थित विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल करने की संभावना तलाशें।''
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