जरुरी जानकारी | कृषि मंत्रालय ने खेती की प्रौद्योगिकी पर डब्ल्यूईएफ से विचार-विमर्श किया

नयी दिल्ली, 11 जुलाई केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने सोमवार को विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के साथ विचार-विमर्श किया। सरकार का इरादा सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के जरिये किसानों को कृषि प्रौद्योगिकी सेवाएं उपलब्ध कराने की है। इस दृष्टि से यह बैठक महत्वपूर्ण है।

अपने 2022-23 के बजट में सरकार ने निजी कृषि-तकनीकी कंपनियों और कृषि मूल्य श्रृंखला के अंशधारकों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के अनुसंधान और विस्तार संस्थानों की साझेदारी में किसानों को डिजिटल और हाई-टेक सेवाएं देने की घोषणा की थी।

डब्ल्यूईएफ के साथ दिनभर चली बैठक में कृषि सचिव मनोज आहूजा और मंत्रालय में मुख्य ज्ञान अधिकारी प्रमोद कुमार मेहरदा के साथ मध्य प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (कृषि) अजीत केसरी उपस्थित थे।

डब्ल्यूईएफ-इंडिया में सेंटर फॉर द फोर्थ इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन (सी4आईआर) के प्रमुख पुरुषोत्तम कौशिक ने अंशधारक परामर्श की योजना तैयार की।

एक सरकारी बयान में कहा गया, ‘‘पीपीपी प्रशासन, डेटा, सैंडबॉक्स, बाजार तक पहुंच, वित्त तक पहुंच तथा लागत एवं परामर्श तक पहुंच पर विचार-विमर्श करने के लिए छह परामर्श समूहों का गठन किया गया।’’

इस परामर्श बैठक में विभिन्न राज्य सरकारों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर, एग्रीटेक स्टार्टअप, कृषि उद्योग, बैंकों, शोध संस्थानों, नागरिक समाज और किसान संगठनों के 140 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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