देश की खबरें | खनन: गोवा लोकायुक्त ने पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ मामला दर्ज नहीं होने पर सरकार को फटकार लगाई
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राज्यपाल को एक चिट्ठी लिखकर, गोवा के लोकायुक्त ने खनन पट्टों के नवीनीकरण में कथित अनियमितताओं को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत परसेकर और अन्य दो के खिलाफ मामला नहीं दर्ज करने पर भाजपा नीत राज्य सरकार के प्रति असंतोष जताया है।
पणजी, 30 मई राज्यपाल को एक चिट्ठी लिखकर, गोवा के लोकायुक्त ने खनन पट्टों के नवीनीकरण में कथित अनियमितताओं को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत परसेकर और अन्य दो के खिलाफ मामला नहीं दर्ज करने पर भाजपा नीत राज्य सरकार के प्रति असंतोष जताया है।
राज्यपाल सत्यपाल मलिक को लिखे पत्र में लोकायुक्त ने महाकाव्य महाभारत के चरित्रों को उद्धृत करते हुए कहा कि सरकार प्रभावशाली और शक्तिशाली लोगों को बचा रही है।
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उल्लेखनीय है कि इस साल जनवरी में गोवा के लोकायुक्त ने राज्य सरकार से पूर्व मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर, तत्कालीन खनन सचिव पवन कुमार सैन और खान एवं भूगर्भ विभाग के पूर्व निदेशक प्रसन्ना आचार्य के खिलाफ गैर कानूनी रूप से लौह अयस्क खनन का पट्टा नवीनीकृत करने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो (एसीबी) के जरिये प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंसा की थी।
लोकायुक्त ने आरोप लगाया है कि खनन पट्टों के नवीनीकरण में भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश रची गई है। हालांकि, गोवा सरकार ने लोकायुक्त द्वारा आरोपी बनाए जाने के बावजूद तीनों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया।
गोवा के लोकायुक्त सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति पीके मिश्रा ने पत्र में कहा,‘‘ 12 जनवरी, 2015 को जो कुछ भी हुआ, उसे केवल धृतराष्ट्र और या गांधारी ही नहीं देख पाते। ऐसा लगता है कि इन दिनों धृतराष्ट्रों या गांधारी की मेरे भारत महान में कोई कमी नहीं है।’’
उन्होंने लिखा, ‘‘ उस मामले में भी, ऐसा लगता है कि उचित सलाह देने में शकुनियों की कोई कमी नहीं है। लोक प्रशासन में 'पुत्र मोह' का स्थान 'पार्टी मोह' या अन्य प्रकार के 'मोह' (लालच) ने ले लिया है तथा केवल भ्रष्टाचार खत्म करने की बात की जा रही है, वास्तव में भ्रष्टाचार खत्म के लिए केवल बातें ही हो रही हैं।’’
लोकायुक्त ने कहा कि प्रभावशाली तथा शक्तिशाली लोगों के बचाव की आम परिपाटी को देखते हुए रिपोर्ट को अस्वीकार करने की उम्मीद पहले से ही थी।
कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लोकायुक्त ने कहा, ‘‘ संस्थान मुख्यमंत्री और राज्यपाल द्वारा जमा की गई कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) में दिए गए कारणों से संतुष्ट नहीं है और मामले की गंभीरता को देखते हुए धारा-16(3) के तहत रिपोर्ट की जरूरत है।’’
उन्होंने कहा कि दोनों एटीआर महाधिवक्ता और प्रत्यक्ष और परोक्ष सलाहकारों की सलाह है तथा एक तरह की हैं।
लोकायुक्त ने कहा, ‘‘ महाधिवक्ता की राय, ऐसा लगता है कि आधे-अधूरे विचारों और कानून के सरसरी वाचन पर आधारित है।’’
लोकायुक्त ने कहा कि उसने 88 पट्टों के नवीकरण की जल्दबाजी का हवाला नहीं दिया है, लेकिन 5 से 12 जनवरी, 2015 के बीच पट्टों के नवीकरण पर विचार किया गया था।
उन्होंने टिप्पणी की कि अगर उपरोक्त कानून अधिकारों का दुरुपयोग नहीं है तो भगवान ही बता सकता है कि ऐसी गतिविधियों का क्या अर्थ है और सिर्फ भगवान ही इस राज्य को बचा सकता है।
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