जरुरी जानकारी | देश में 93% परिवारों में मीटर युक्त बिजली कनेक्शन, नियमित तौर पर बिल का भुगतान: अध्ययन
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. देश में 93 प्रतिशत घरों में मीटर लगे बिजली कनेक्शन है और 91 प्रतिशत घर बिजली खपत के एवज में नियमित रूप से बिल का भुगतान करते हैं। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) ने दो स्वतंत्र अध्ययन जारी कर यह बात कही है।
नयी दिल्ली, सात अक्टूबर देश में 93 प्रतिशत घरों में मीटर लगे बिजली कनेक्शन है और 91 प्रतिशत घर बिजली खपत के एवज में नियमित रूप से बिल का भुगतान करते हैं। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (सीईईडब्ल्यू) ने दो स्वतंत्र अध्ययन जारी कर यह बात कही है।
ये अध्ययन इंडिया रेजिडेंशियल एनर्जी सर्वे (आरईआरईएस) 2020 में प्राप्त जानकारी पर आधारित है। यह अध्ययन सीईईडबल्यू ने इनीशिएटवि फॉर सस्टेनेबल एनर्जी पॉलिसी के साथ मिलकर किया।
आईआरईएस देश भर में ऊर्जा की पहुंच, खपत और ऊर्जा दक्षता के बारे में पता लगाने के लिये किया गया अपनी तरह का पहला सर्वे है। इसमें 21 राज्यों के 152 जिलों में 15,000 परिवार को शामिल किया गया।
काउंसिल ने एक बयान में कहा, ‘‘कुल 93 प्रतिशत उपभोक्ताओं के घरों में मीटर के साथ बिजली पहुंची है और 91 प्रतिशत नियमित रूप से बिल का भुगतान करते हैं। सीईईउब्ल्यू द्वारा जारी दो स्वतंत्र अध्ययनों से यह पता चलता है।’’
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बयान के अनुसार ग्रिड के जरिये बिजली प्राप्त करने वाले 77 प्रतिशत उपभोक्ता बिजली सेवा से संतुष्ट हैं।
बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओड़िशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के ग्रमीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की बिजली को लेकर संतुष्टि तीन गुनी होकर 2020 में 73 प्रतिशत रही जो 2015 में 23 प्रतिशत थी।
अध्ययन में घरों में ऊर्जा दक्षता का भी पता लगाया गया। इसमें पाया गया कि 88 प्रतिशत भरतीय घरों में एलईडी बल्ब का उपयोग हो रहा है। इसका एक प्रमुख कारण सरकार का उजाला (उन्नत ज्योति बाई एफोर्डेबल एलईडी फॉर ऑल) कार्यक्रम और अन्य राज्यों की इस दिशा में उठाये गये कदम हैं।
बिजली मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव संजय मल्होत्रा ने कहा, ‘‘हालांकि लोगों की बढ़ती उम्मीदों के साथ 77 प्रतिशत संतोष का स्तर बेहतर है लेकिन 23 प्रतिशत परिवार का असंतुष्ट होना भी बड़ा आंकड़ा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘संतोषजनक स्तर को 77 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत और उससे अधिक करने को लेकर हमारा जोर अब गुणवत्तापूर्ण, भरोसेमंद बिजली और ग्राहकों की संतुष्टि पर होने जा रहा है। हम वितरण कंपनियों की रैंकिंग को लेकर रूपरेखा तैयार करने के लिये समिति गठित करने जा रहे हैं। बिजली के मामले में ग्राहकों के संतोष की स्थिति में सुधार और वितरण कंपनियों की व्यवहार्यता और उन्हें बाजार में बने रहना महत्वपूर्ण है।’’
मल्होत्रा ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की वितरण कंपनियों का नुकसान लगभग एक रुपये यूनिट है। गरीब घरों को बिजली उपलब्ध कराने के साथ वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार जरूरी है।
सीईईडब्ल्यू अध्ययन के अनुसार 97 प्रतिशत भारतीय घर ग्रिड से जुड़े है। वही 0.33 प्रतिशत परिवार सौर आधारित होम सिस्टम, सौर मिनी ग्रिड और बैटरी भंडार जैसे ऑफ ग्रिड बिजली स्रोतों पर आश्रित हैं।
हालांकि ऐसा अनुमान है कि 2.4 प्रतिशत भारतीय परिवार तक अबतक बिजली नहीं पहुंची है। ऐसे ज्यादातर घर उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि ग्रिड वाली बिजली का ये बिल चुकाने में असमर्थ हैं। जिसकी वजह से इनके घरों में कनेक्शन नहीं हैं।
सीईईडब्ल्यू अध्ययन में यह भी पाया गया कि केवल 17 पतिशत ग्राहक डिजिटल रूप से बिल का भुगतान करते हैं। शहरी क्षेत्रों में यह अनुपात 27 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 12 प्रतिशत है। यह स्थिति तब है जब देश के 70 प्रतिशत घरों में स्मार्टफोन है।
इसमें कहा गया है कि औसतन भारतीय परिवार ग्रिड से 20.6 घंटा बिजली प्राप्त करता है। शहरी परिवारों को 22 घंटे बिजली मिलती है।
हालांकि दो तिहाई ग्रामीण घरों और 40 प्रतिशत शहरी परिवारों को दिन में एक बार बिजली कटौती का सामना करना पड़ता है।
अध्ययन में सतत विकास लक्ष्य हासिल करने के लिये 2.4 प्रतिशत परिवारों को चिन्हित करने और उन तक बिजली पहुंचाने के साथ सस्ती दर पर सतत बिजली उपयोग पर जोर देने की सिफारिश की गयी है।
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