नयी दिल्ली, 28 मई केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने रविवार को नये संसद भवन के उद्घाटन समारोह के बहिष्कार के विभिन्न राजनीतिक दलों के फैसले को ‘ओछी राजनीति’ का उदाहरण बताया।
उन्होंने ‘सेंगोल’ की प्रासंगिकता पर सवाल उठाने के लिए विपक्षी दलों की आलोचना भी की।
मेघवाल ने कहा कि बहिष्कार के आह्वान का समर्थन नहीं करने वाले कई विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने बताया कि उच्चतम न्यायालय के कई न्यायाधीशों और संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों ने भी नये संसद भवन के लोकसभा कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की।
मेघवाल ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘हम उनसे (समारोह में शामिल होने का) अनुरोध करते रहे। यहां तक कि वरिष्ठ नेताओं ने भी अनुरोध किया। उन्होंने हमारे अनुरोध को नजरअंदाज किया और कार्यक्रम का बहिष्कार किया। यह ‘ओछी राजनीति’ का उदाहरण है।’’
मंत्री ने याद करते हुए कहा कि जब संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के शासन के दौरान मीरा कुमार लोकसभा अध्यक्ष थीं, तब एक नया संसद भवन बनाने पर चर्चा हुई थी।
उन्होंने कहा कि हालांकि, इस विचार को खारिज कर दिया गया और कहा गया कि अगली जनगणना होने पर फैसला लिया जाएगा।
मेघवाल ने सवाल किया, ‘‘अब परिसीमन निकट है। संसद के सदस्यों की संख्या बढ़ेगी। वे कहां बैठेंगे?’’
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने कार्यक्रम का बहिष्कार किया, वे भी जब इमारत को देखेंगे, तो उसकी सराहना करेंगे।
मेघवाल ने कहा कि हालांकि, ये लोग राजनीतिक मजबूरियों के कारण खुले तौर पर ऐसा नहीं कर पाएंगे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी राजनीतिक विवशता में बयान दे रहे हैं।
मेघवाल ने अंग्रेजों द्वारा भारत को सत्ता हस्तांतरित करने के प्रतीक के तौर पर सेंगोल राजदंड की भूमिका और महत्व पर संदेह करने वाले कांग्रेस नेताओं पर भी सवाल उठाया।
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