नयी दिल्ली, तीन मई केंद्र सरकार ने कहा है कि कई राज्यों ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि उन्होंने आदर्श कारागार नियमावली-2016 को अपनाया है या नहीं। इस नियमावली के तहत कई सुधारों की सिफारिश की गई है, जिसमें जेल के अंदर भ्रष्ट आचरण, कर्मचारियों की अनावश्यक आवाजाही और मोबाइल फोन का इस्तेमाल रोकना शामिल है।
सभी राज्यों को भेजे एक पत्र में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि आदर्श कारागार नियमावली-2016 सभी राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को मई 2016 में भेजी गई थी और इसका मकसद देश की जेलों पर लागू होने वाले बुनियादी सिद्धांतों में एकरूपता लाना है।
पत्र में कहा गया है, “गृह मंत्रालय द्वारा लगातार स्थिति जानने का प्रयास करने के बावजूद कई राज्यों ने अभी तक आदर्श कारागार नियमावली को अपने अधिकार क्षेत्र में लागू किए जाने की पुष्टि नहीं की है। राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों से अनुरोध है कि वे इस प्रक्रिया में तेजी लाएं।”
नियमावली का हवाला देते हुए गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को जेलों में भ्रष्ट आचरण पर रुख कड़ा करने तथा जेल कर्मचारियों को नियमित आधार पर बदलने का सुझाव दिया है।
उसने कहा कि हर दो साल में कर्मचारियों का अंतर-जेल (जेल के अंदर नहीं) स्थानांतरण वांछनीय माना जाता है।
गृह मंत्रालय ने कहा कि जेल के अंदर-बाहर जेल कर्मचारियों की गैर-जरूरी आवाजाही को प्रभावी ढंग से नियंत्रित और प्रतिबंधित किया जाना चाहिए, जिसके लिए कर्मचारियों का उचित प्रवेश एवं निकासी रजिस्टर बनाया जा सकता है।
पत्र के मुताबिक, सभी जेलों के ढांचे व बाहरी दीवारों का निरीक्षण किया जाए और जहां तक संभव हो, यह सुनिश्चित किया जाए कि जेल वार्ड की दीवार तथा परिसर की बाहरी दीवार के बीच की दूरी इस तरह हो कि बाहर से प्रतिबंधित सामग्री फेंकने की घटनाएं मुमकिन न हों।
इसमें कहा गया है कि जेल से जुड़ी गतिविधियों में शामिल गैर-सरकारी संगठनों की पृष्ठभूमि का समय-समय पर सत्यापन कराया जाना चाहिए।
पत्र के अनुसार, मोबाइल फोन तक कैदियों की अवैध पहुंच और इसका उपयोग प्रतिबंधित करने के लिए आधुनिक तकनीक के साथ-साथ अधिक प्रभावी जैमर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
इसमें कहा गया है कि कैदियों को अपराध की दुनिया छोड़ने और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित किया जाए।
पत्र के मुताबिक, पहली बार अपराध करने वालों और बार-बार आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने वालों को अलग-अलग वार्ड व परिसर में रखा जाना चाहिए, ताकि आदतन अपराधी पहली बार जुर्म करने वालों को प्रभावित न कर पाएं।
गृह मंत्रालय ने कहा कि जेल के अस्पतालों और डिस्पेंसरी में चिकित्सा सुविधाओं को इस तरह से मजबूत व बेहतर बनाया जाए कि कैदियों को जेल परिसर के बाहर के स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों में रेफर करने की जरूरत कम ही पड़े।
मंत्रालय के अनुसार, कैदियों में अवसाद का स्तर घटाने और उनमे सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए सक्षम चिकित्सा पेशेवरों द्वारा उनके मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन पर ध्यान दिया जाए।
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