देश की खबरें | मणिपुर के शीर्ष नगा संगठन ने आर्थिक नाकेबंदी हटाने की मांग की

इंफाल, छह सितंबर मणिपुर में नगा जनजातियों के शीर्ष संगठन यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) ने बुधवार को कांगपोकपी जिला स्थित एक आदिवासी संगठन से राज्य में रहने वाले सभी समुदायों के हित में राजमार्गों पर आर्थिक नाकेबंदी हटाने का अनुरोध किया।

यूएनसी ने राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों और अंतर-जिला राजमार्गों पर ‘‘अवैध कर संग्रह’’ को तत्काल रोकने का भी आह्वान किया।

कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (सीओटीयू) ने राज्य के पर्वतीय इलाकों में कुकी-जो समुदायों को आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त आपूर्ति की मांग को लेकर 21 अगस्त को कांगपोकपी जिले में दो राष्ट्रीय राजमार्गों एनएच-2 और एनएच-37 पर अनिश्चितकालीन नाकाबंदी लगा दी। एनएच-2 इंफाल को नगालैंड के दीमापुर से जोड़ता है, वहीं एनएच-37 इंफाल को असम के सिलचर से जोड़ता है।

सीओटीयू से तुरंत आर्थिक नाकेबंदी हटाने का आह्वान करते हुए यूएनसी ने मणिपुर और केंद्र सरकार से राज्य के हर क्षेत्र में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया।

यह बयान नगा समुदाय के एक ड्राइवर पर दो लोगों द्वारा हमला करने और उससे 300 रुपये की मांग करने के एक दिन बाद आया है।

यूएनसी ने कहा कि राज्य में दो अन्य समुदायों के बीच झड़पों के कारण नगाओं को ‘‘हर क्षेत्र में काफी दुख झेलना पड़ रहा है।’’

अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में जनजातीय एकजुटता मार्च के आयोजन के बाद तीन मई को राज्य में हुई जातीय झड़पों के बाद से 160 से अधिक लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए।

मणिपुर की आबादी में मेइती लोगों की आबादी लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। नगा और कुकी 40 प्रतिशत से कुछ अधिक हैं और पर्वतीय जिलों में रहते हैं।

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