देश की खबरें | मणिपुर ने विशेष पद सृजित कर सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी को एसएसपी (कॉम्बैट) नियुक्त किया

इंफाल, चार सितंबर मणिपुर सरकार ने आठ साल पहले म्यांमा में उग्रवादी शिविरों के खात्मे के अभियान की कमान संभाल चुके सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी नेक्टर संजेनबम को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (कॉम्बैट) नियुक्त किया है।

अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि कई पदकों और पुरस्कारों से सम्मानित पूर्व सैन्य अधिकारी के लिए खासतौर से यह पद सृजित किया गया है। संजेनबम की भूमिका क्या होगी, इस बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है लेकिन माना जा रहा है कि राज्य सरकार मणिपुर की जातीय हिंसा से निपटने में उनके अनुभवों का लाभ लेना चाहती है।

कर्नल (सेवानिवृत्त) नेक्टर संजेनबम की पांच साल के लिए नियुक्ति तब की गयी है जब इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले महीने कहा था कि उग्रवादियों पर सैन्य कार्रवाई के बाद कुकी लोगों ने गैरकानूनी रूप से म्यांमा से मणिपुर में प्रवेश करना शुरू कर दिया।

पूर्वोत्तर राज्य में संघर्षरत समुदायों में से एक मेइती के एक संगठन ने भी दावा किया है कि चार महीने से चल रही हिंसा मुख्य रूप से म्यांमा से आए अवैध शरणार्थियों द्वारा कुछ इलाकों में वनों की कटाई, अफीम की अवैध खेती और जनसांख्यिकी में परिवर्तन के लेकर बने तनाव की अभिव्यक्ति है।

ऐसा आरोप है कि म्यांमा के उग्रवादी मणिपुर में हथियारों की आपूर्ति कर रहे हैं।

राज्य के गृह विभाग ने एक आदेश में कहा, ‘‘मणिपुर के राज्यपाल को कर्नल (सेवानिवृत्त) नेक्टर संजेनबम को तत्काल प्रभाव से मणिपुर पुलिस विभाग में पांच साल की अवधि के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (कॉम्बैट) के रूप में नियुक्त करते हुए खुशी हो रही है।’’

सेना ने बताया था कि कर्नल (सेवानिवृत्त) संजेनबम ने जून 2015 में म्यांमा में उग्रवादियों के खिलाफ अभियानों की अगुवाई की थी। यह कार्रवाई तब की गयी थी जब उग्रवादियों ने मणिपुर के चंदेल जिले में हमला किया था, जिसमें सेना के 18 जवान शहीद हो गए थे। सेना ने बताया कि इन अभियानों में उग्रवादियों को काफी नुकसान पहुंचा था।

ऐसा लगता है कि सरकार मणिपुर में स्थिति से निपटने के लिए म्यांमा में उग्रवाद रोधी अभियानों में सेवानिवृत्त कर्नल के अनुभव का उपयोग करना चाहती है।

मणिपुर में मई में भड़की हिंसा में अब तक 160 से अधिक लोगों की जान चली गयी है।

पिछले साल समय से पहले ही सेवानिवृत्त हुए कर्नल संजेनबम को म्यांमा में अभियान में उनकी भूमिका के लिए कीर्ति चक्र वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

लोकसभा में 10 अगस्त को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान शाह ने कहा था कि मणिपुर में पड़ोसी देश म्यांमा से कुकी शरणार्थियों के आने के बाद समस्याएं शुरू हुईं। ये शरणार्थी म्यांमा के सैन्य शासकों द्वारा 2021 में उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के बाद मणिपुर आए।

शाह ने कहा था कि कुकी शरणार्थियों ने मणिपुर घाटी के जंगलों में रहना शुरू कर दिया जिससे क्षेत्र में जनसांख्यिकीय बदलाव का डर पैदा हो गया।

अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मैतेई समुदाय की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में जनजातीय एकजुटता मार्च आयोजित किए जाने के बाद मई की शुरुआत में मणिपुर में जातीय हिंसा भड़क गई थी, जिसमें 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और सैकड़ों अन्य घायल हुए हैं।

मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। वहीं, नगा और कुकी जैसे आदिवासियों की आबादी 40 प्रतिशत से कुछ अधिक है और वे ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)