मलिक ने कहा कि नेकां, पीडीपी ने चुनावों में हिस्सा लेने से इनकार किया, उमर का पलटवार
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श्रीनगर, 23 मई नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने जम्मू- कश्मीर के राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक पर “अकसर झूठ बोलने” का आरोप लगाते हुए शनिवार को कहा कि वह अपने नाम के अनुरूप व्यवहार नहीं करते।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, फिलहाल गोवा के राज्यपाल मलिक ने कहा कि दो क्षेत्रीय दलों ने पाकिस्तान के दबाव में चुनावों (जम्मू-कश्मीर में) में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था।

मलिक ने शनिवार को कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि हम पंचायत चुनाव (जम्मू-कश्मीर में) कराएंगे। मैं प्रोटोकाल तोड़ते हुए उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के घर गया। उन्होंने पाकिस्तान के दबाव में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। आतंकवादियों ने भी धमकी दी, इसके बावजूद चुनाव सफलतापूर्वक हुए।”

इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उमर ने कहा कि प्रदेश के पूर्व राज्यपाल झूठ बोल रहे हैं।

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “सिर्फ नाम का सत्य, काम का नहीं। वह कभी झूठ बोलते नहीं थकते। पांच अगस्त से पहले जम्मू-कश्मीर के लोगों से झूठ बोला और अब भी झूठ बोल रहे हैं। राजभवन की दीवारों के पीछे मानहानि के वाद से महफूज होने की वजह से वह कुछ भी कहने की हिम्मत कर रहे हैं। जब वह राज्यपाल न हों तब यह सब कहें और देखें।”

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, “आम तौर पर मैं उनकी निरर्थक बातों का जवाब नहीं देता लेकिन तब कुछ लोग यह मानने लगते हैं कि वह सच कह रहे हैं, मैंने जाना कि उनके झूठ को झेलना मुश्किल है इसलिए मैं उनके झूठ को भी नजरअंदाज नहीं करता।”

पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सितंबर 2018 में यह कहते हुए शहरी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों का बहिष्कार किया था कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष संवैधानिक दर्जे की सुरक्षा के लिये प्रतिबद्ध नहीं है।

दोनों दलों ने घोषणा की थी कि वे तब तक चुनावों में हिस्सा नहीं लेंगे जब तक केंद्र और राज्यपाल प्रशासन अनुच्छेद 35-ए पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर देते जो जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देता है।

केंद्र सरकार ने पांच अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-ए को खत्म कर राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों -- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया था।

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