देश की खबरें | महाराष्ट्र में हर साल 170 जीजी पीएम10 का उत्सर्जन : अध्ययन

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नागपुर, दो अक्टूबर महाराष्ट्र में हर साल वातावरण में 1,700 गीगा ग्राम (जीजी) पीएम10 का उत्सर्जन होता है और इसमें बड़ी हिस्सेदारी सड़कों पर उड़ने वाली धूल की है। एक अध्ययन में यह खुलासा हुआ।

पर्यावरण अनुसंधानकर्ताओं द्वारा वर्ष 2019 से 2020 के बीच किए गए अध्ययन के मुताबिक सड़क से उड़ने वाली धूल का योगदान पीएम-10 प्रदूषण में 29 प्रतिशत रहा जबकि आवासीय क्षेत्र का योगदान 22 प्रतिशत रहा।

पर्यावरण अनुसंधानकर्ता डॉ. सरोज कुमार साहू ने अपने अध्ययन में दावा किया कि महाराष्ट्र में वर्ष 2019-2020 के दौरान 1,700 गीगा ग्राम पीएम-10 का उत्सर्जन हुआ जिसमें सबसे अधिक 29 प्रतिशत योगदान सड़क पर उड़ने वाली धूल का रहा।

ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित उत्कल विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक डॉ. साहू ने कहा कि परिवहन क्षेत्र का पीएम-10 के प्रदूषण में 10 प्रतिशत योगदान था और निर्माण गतिविधियों से इस अवधि में 6.5 प्रतिशत पीएम-10 का उत्सर्जन हुआ।

उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में वर्ष 2019-2020 के दौरान वातावरण में मौजूद पीएम-10 में शहरों से निकलने वाला कचरा के जलाए जाने की हिस्सेदारी 5.3 प्रतिशत रही और कृषि अपशिष्ट के जलाने की हिस्सेदारी 5.7 प्रतिशत थी।

अध्ययन में खुलासा हुआ कि ताप विद्युत संयंत्र और उद्योग भी पीएम-10 के उत्सर्जन के अहम कारकों में से एक है।

रिपोर्ट में कहा गया कि खुले में कूड़ा जलाने से नयी चुनौती पैदा हुई है जिससे विभिन्न प्रकार का प्रदूषण वायुमंडल में फैलता है।

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