करोड़ों पाउंड चंदा जुटाने वाले पूर्व ब्रिटिश सैनिक को ‘नाइटहुड’ से सम्मानित करेंगी महारानी

लंदन, 20 मई ब्रिटेन की सेना से सेवानिवृत्त हो चुके सौ वर्षीय कैप्टन टॉम मूर को महारानी एलिजाबेथ (द्वितीय) बुधवार को नाइटहुड की उपाधि से सम्मानित करेंगी।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत में सेवा दे चुके कैप्टन मूर ने हाल ही में कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) के वास्ते ब्रिटेन में तीन करोड़ बीस लाख पाउंड का चंदा इकठ्ठा करने में सहायता की है।

कैप्टन मूर ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन द्वारा नाइटहुड की उपाधि के लिए उन्हें विशेष रूप से नामित किया गया है और महारानी ने इसे स्वीकृति दे दी है तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

मूर को कर्नल की मानद रैंक मिल चुकी है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के नियमों के तहत नाइटहुड की उपाधि मिलने के बाद, आधिकारिक रूप से उन्हें कैप्टन सर थॉमस मूर कहा जाएगा।

मूर ने कहा, “मुझे बहुत खुशी हुई। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इतना बड़ा सम्मान मिलेगा।”

उन्होंने कहा, “मैं महारानी एलिजाबेथ, प्रधानमंत्री और ब्रिटेन की महान जनता को धन्यवाद देता हूं। मैं हमेशा आपकी सेवा में उपस्थित रहूंगा। यह छोटे स्तर पर शुरू हुआ था और ब्रिटेन की जनता द्वारा दिए गए सम्मान और प्रेम से अभिभूत हूं।”

उन्होंने कहा, “हमें इस अवसर पर अग्रिम मोर्चे पर काम करने वाले एनएचएस के हमारे नायकों का सम्मान करना चाहिए जो प्रतिदिन अपनी जान जोखिम में डालकर हमारी सुरक्षा में लगे हैं।”

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कैप्टन मूर को “राष्ट्रीय संपत्ति” करार दिया है जिन्होंने “कोरोना वायरस की धुंध के बीच प्रकाश दिखाने का काम किया।”

महामारी के दौरान चंदा इकठ्ठा करने के उनके प्रयासों के लिए मूर को 30 अप्रैल को उनके सौंवें जन्मदिन के अवसर पर कर्नल की मानद रैंक दी गई थी।

अपने सौंवें जन्मदिन से पहले मूर ने चार डंडों वाली बैसाखी के सहारे अपने बगीचे के सौ चक्कर लगाने की योजना बनाई थी जिससे उन्हें हजार पाउंड तक चंदा मिलने की उम्मीद थी।

परंतु सौंवा चक्कर समाप्त होने के बाद भी लोग चंदा देते रहे और राशि तीन करोड़ पौंड से अधिक हो गई।

विपक्षी पार्टी के नेता ने भी मूर को उनकी उपलब्धि के लिए बधाई दी।

ड्यूक ऑफ वेलिंग्टन रेजिमेंट की आठवीं बटालियन में 1940 में शामिल हुए मूर ने भारत और बर्मा में सैन्य सेवा दी थी और उसके बाद सैन्य प्रशिक्षण भी दिया था।

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