देश की खबरें | सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में आध्यात्मिक नगरी बसाएगी मप्र सरकार : मोहन यादव
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भोपाल, 25 फरवरी मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार को कहा कि वर्ष 2028 में लगने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले राज्य सरकार उज्जैन में आध्यात्मिक नगरी बसाने की योजना बना रही है।
यादव ने राज्य के वैश्विक निवेशक सम्मेलन ‘‘इन्वेस्ट मध्यप्रदेश’’ को संबोधित करते हुए आध्यात्मिक और वन्यजीव पर्यटन के क्षेत्रों में राज्य की संभावनाओं के बारे में विस्तार से बात की।
मुख्यमंत्री ने कहा, "उज्जैन में लगभग 3,300 हेक्टेयर क्षेत्र में आध्यात्मिक नगरी बसाने की योजना को मंजूरी दी जा रही है।"
उन्होंने बताया कि यह कदम उज्जैन में वर्ष 2028 में लगने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए राज्य सरकार की तैयारियों के तहत उठाया जा रहा है।
सिंहस्थ कुंभ मेला उज्जैन में हर 12 साल में क्षिप्रा नदी के तट पर लगता है।
यादव ने कहा, ‘‘साधु-संतों, महंतों, महामंडलेश्वरों और शंकराचार्यों समेत सभी आध्यात्मिक हस्तियों को राज्य सरकार द्वारा उज्जैन में उनके आश्रम स्थापित करने के लिए जगह दी जाएगी। प्रस्तावित आध्यात्मिक नगरी में विद्यालय, महाविद्यालय, अस्पताल और धर्मशालाएं होंगी। निजी कंपनियां भी इन्हें विकसित कर सकती हैं।’’
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार पर्यटन सहित सभी क्षेत्रों में निजी कंपनियों का निवेश आकर्षित करने के लिए निवेशकों के अनुकूल नीतियां बना रही है।
यादव ने कहा, "जैसे ही हमारी सरकार बनी, हमने सबसे पहले पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा दिया।"
उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र की अपार संभावनाओं को देखते हुए प्रदेश सरकार ने नीतिगत सुधार किए हैं, बुनियादी ढांचे का विस्तार किया है और सतत विकास को प्राथमिकता दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने बेहतर हवाई संपर्क के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक विमानन नीति तैयार की है।
उन्होंने कहा कि सरकार राज्य से आने-जाने वाली उड़ानों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से विमानन कंपनियों को प्रति उड़ान 7.5 लाख रुपये का प्रोत्साहन दे रही है। इसके अलावा, चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा एयर एम्बुलेंस सेवा भी प्रदान की जा रही है।
वन्यजीव पर्यटन को लेकर राज्य में प्रचुर संभावनाओं पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में भारत के कुछ सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव अभ्यारण्य हैं जिनमें बाघ अभ्यारण्य और चीतों को भारत में फिर से बसाए जाने की परियोजना से जुड़ा अभ्यारण्य शामिल हैं।
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