देश की खबरें | एलएसआर छात्रा आत्महत्या: संस्थागत जांच की मांग करते हुए छात्र यूजीसी मुख्यालय के बाहर धरने पर बैठे

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली के विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों ने लेडी श्रीराम कॉलेज की एक छात्रा की मौत के मामले में संस्थागत जांच की मांग करते हुए यूजीसी मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। पिछले सप्ताह अपने परिवार की खराब माली हालत को देखते हुए शिक्षा पर होने वाले खर्च की चिंता में एलएसआर की एक छात्रा ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी ।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 12 नवंबर दिल्ली के विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों ने लेडी श्रीराम कॉलेज की एक छात्रा की मौत के मामले में संस्थागत जांच की मांग करते हुए यूजीसी मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। पिछले सप्ताह अपने परिवार की खराब माली हालत को देखते हुए शिक्षा पर होने वाले खर्च की चिंता में एलएसआर की एक छात्रा ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी ।

विरोध कर रहे छात्रों में से एक ने कहा, “इस महामारी के दौरान छात्रवृत्ति के वितरण में लापरवाही, प्रशासन की ओर से अनजान बने रहना और ऑनलाइन शिक्षा की व्यवस्था ने अलग-अलग तरीकों से कई लोगों की जान ले ली है और ऐश्वर्या जैसे हजारों छात्रों का भविष्य बर्बाद किया है।”

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धरने का आह्वान वाम समर्थित आल इंडिया स्टूडेंट अशोसिएशन(आइसा) के छात्रों ने किया था।

पुलिस ने बताया कि भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही ऐश्वर्या का शव दो नवंबर को रंगा रेड्डी जिले के शादनगर इलाके में स्थित उसके घर में फंदे से लटका हुआ मिला।

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गणित ऑनर्स की दूसरे वर्ष की छात्रा कोविड-19 महामारी के कारण छात्रावास बंद होने के बाद मार्च में दिल्ली से लौटी थी।

‘‘समाज में वर्ग-जाति-लिंग विभाजन के कारण डिजिटल डिवाइड(इंटरनेट सुविधाओं तक पहुंच में भेद) बढ़ता जा रहा है और जिसके परिणामस्वरूप असमानताएं बढ़ रही हैं जो महामारी के जाने के बाद भी प्रभावित करेंगी। हम एलएसआर छात्रा की संस्थागत हत्या की स्वतंत्र जांच की मांग करते हैं।”

विरोध कर रहे छात्रों द्वारा प्रस्तुत मांग पत्र में कहा गया है, ‘‘हम जेआरएफ और एसआरएफ सहित सभी लंबित छात्रवृत्तियों का वितरण और कॉलेज परिसरों, छात्रावासों और अन्य विश्वविद्यालय सुविधाओं को फिर से खोलना चाहते हैं।”

पत्र के मुताबिक,‘‘इंटरनेट का प्रावधान जरूरतमंद लोगों के लिए किया जाना चाहिए और सरकार को बिलों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। महामारी के बीच छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं । संसाधनों की कमी से लेकर सरकार की ओर से लचीलेपन की कमी से भारत के सबसे गरीब तबके के छात्रों की शिक्षा को बहुत नुकसान पहुंचा है।”

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