ताजा खबरें | लोकसभा ने शोर-शराबे के बीच जैव विविधता संशोधन विधेयक को मंजूरी दी

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. लोकसभा ने शोर शराबे के बीच मंगलवार को ‘जैव विविधता (संशोधन) विधेयक, 2022’ को मंजूरी दे दी जिसमें जैव संसाधनों का उपयोग करते अनुसंधान को तेज करके, पेटेंट संबंधी आवेदन की प्रक्रिया एवं अनुसंधान परिणामों को सुगम बनाने पर जोर दिया गया है।

नयी दिल्ली, 25 जुलाई लोकसभा ने शोर शराबे के बीच मंगलवार को ‘जैव विविधता (संशोधन) विधेयक, 2022’ को मंजूरी दे दी जिसमें जैव संसाधनों का उपयोग करते अनुसंधान को तेज करके, पेटेंट संबंधी आवेदन की प्रक्रिया एवं अनुसंधान परिणामों को सुगम बनाने पर जोर दिया गया है।

मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सदन में बयान देने और फिर चर्चा कराने की मांग कर रहे विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच केंद्रीय पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने संसद की संयुक्त समिति द्वारा प्रेषित उक्त विधेयक सदन के विचारार्थ और पारित करने के लिए प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा कि यह विधेयक संसद की संयुक्त समिति के अध्ययन के बाद आया है और समिति में सभी दलों के सदस्यों की विधेयक के मसौदे पर सहमति थी।

विधेयक पर सदन में संक्षिप्त चर्चा की शुरूआत करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संजय जायसवाल ने कहा कि 2002 में जैव विविधता कानून 1992 के संयुक्त राष्ट्र के एक समझौते के आधार पर लाया गया था।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कुछ राज्यों ने जैव विविधता विधेयक के गलत फायदे उठाने शुरू कर दिये और अनुचित तरीके से कुछ गतिविधियों को जैव विविधता से जोड़ा जाने लगा।

विधेयक पर विचार करने वाली संसद की संयुक्त समिति के अध्यक्ष रहे जायसवाल ने कहा कि नये विधेयक के लागू होने के बाद भारतीय कपंनियों को लाभ होगा और जड़ी-बूटियों की चोरी रुकेगी।

भाजपा की अपराजिता सारंगी ने कहा कि संसद की संयुक्त समिति ने विधेयक पर गहन अध्ययन किया और सभी हितधारकों के सुझावों के बाद अंतिम मसौदा इस सदन को भेजा।

बहुजन समाज पार्टी के मलूक नागर ने कहा कि इस विधेयक से किसानों का फायदा होगा।

उन्होंने इस दौरान आसन के समीप आकर विरोध प्रदर्शन कर रहे सदस्यों की ओर इशारा करते हुए कहा कि ये सदस्य अन्य सांसदों के मौलिक अधिकारों का हनन कर रहे हैं।

विधेयक पर संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि पिछले नौ वर्ष में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में, विशेष रूप से पर्यावरण के क्षेत्र में बहुत योगदान दिया है।

उन्होंने कहा कि जैव विविधता कानून 2002 में बना था जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राजग की सरकार थी और अब यह विधेयक लाया जा रहा है जब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राजग सरकार है।

यादव ने कहा, ‘‘इससे पर्यावरण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता पता चलती है।’’

उन्होंने कहा कि जैव विविधता कानून के लागू होने के बाद करीब 20 साल में इस क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न जमीनी समस्याओं को देखा गया और जैव विविधता संरक्षण के लिए तथा समान बंटवारे के लिए यह संशोधन किये जाने आवश्यक थे।

यादव ने कहा कि मोदी सरकार ने आयुष मंत्रालय बनाया जिसने जैव विविधता से जुड़े उत्पादों के उपयोग पर काम किया और इस क्षेत्र में अनुसंधान तथा आकदमिक सहयोग बढ़ाने के लिए संशोधन आवश्यक लगे और इस लिहाज से यह संशोधन विधेयक लाया गया।

उन्होंने कहा कि इस विधेयक को संसद की संयुक्त समिति को भेजा गया था जिसकी रिपोर्ट के आधार पर मौजूदा संशोधन विधेयक लाया गया है।

मंत्री के जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी दे दी। इस दौरान विपक्षी सदस्य मणिपुर के मुद्दे पर अपनी मांग को लेकर शोर शराब कर रहे थे।

केंद्रीय मंत्री यादव ने दिसंबर, 2021 में निचले सदन में ‘जैव विविधता (संशोधन) विधेयक, 2021’ पेश किया था जिसे बाद में अध्ययन के लिए संसद की संयुक्त समिति को भेज दिया गया था।

समिति ने अध्ययन के बाद ‘जैव विविधता (संशोधन) विधेयक, 2022’ सदन को भेजा।

इस विधेयक में जैव संसाधनों का उपयोग करते अनुसंधान को तेज करके, पेटेंट आवेदन की प्रक्रिया एवं अनुसंधान परिणामों को सुगम बनाने पर जोर दिया गया है।

इसमें जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र संधि और नागोया प्रोटोकाल के उद्देश्यों से समझौता किये बिना भारत में उपलब्ध जैव संसाधनों का उपयोग करते हुए अनुसंधान को तेज करके, पेटेंट आवेदन की प्रक्रिया एवं अनुसंधान परिणामों को सुगम बनाने पर जोर दिया गया है।

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