ताजा खबरें | लोकसभा ने खनिज क्षेत्र से जुड़े विधेयक को मंजूरी दी

नयी दिल्ली, एक अगस्त लोकसभा ने मंगलवार को ‘अपतट क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2023’ को मंजूरी दी जिसके माध्यम से 2002 के अधिनियम में संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है।

कोयला एवं खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विधेयक पर सदन में हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब दिया जिसके बाद सदन ने ध्वनिमत से इसे मंजूरी दी। विधेयक को पारित किए जाने के दौरान विपक्ष के सदस्य मणिपुर के मुद्दे को लेकर लगातार नारेबाजी करते रहे।

विधेयक पर संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए जोशी ने कहा, ‘‘मुझे बहुत दुख हो रहा है कि विपक्ष के लोग इतने महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करने के लिए तैयार नहीं हैं।’’

उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इन लोगों की सरकार में कोयला ब्लॉक का मनमाने ढंग से आवंटन किया गया था और कोई पारदर्शिता नहीं थी।

जोशी ने कहा, ‘‘हम नीलामी के जरिये आवंटन कर रहे हैं। हम पारदर्शिता लाए हैं। अब भाई-भतीजे को आवंटन नहीं हो रहा है। इसलिए ये लोग नारेबाजी कर रहे हैं।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि ‘‘पहले कांग्रेस कार्यालय से पत्र आता था तो कोयला खदानों का आवंटन किया जाता था’’।

चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के गोपाल शेट्टी ने कहा कि विधेयक से पारदर्शिता आएगी और कारोबार सुगमता में भी मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि इस विधेयक के पारित होने के बाद सभी राज्यों को बड़े पैमाने पर पैसा मिलेगा।

बीजू जनता दल के पिनाकी मिश्रा और बहुजन समाज पार्टी के मलूक नागर ने भी विधेयक का समर्थन किया।

विधेयक के माध्यम से ‘अपटत क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 2002’ में संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है।

इसे विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि भारत, नौ तटीय राज्यों और चार संघ राज्य क्षेत्रों की लंबी तटरेखा और वृहद आर्थिक क्षेत्र एवं समुद्री स्थिति में होने के बावजूद अपनी विकास संबंधी जरूरतों के लिए अपतटीय खनिज संसाधनों का दोहन नहीं कर पा रहा है।

इनके अनुसार वर्तमान कानून में परिचालन अधिकारों को आवंटित करने के लिए एक निष्पक्ष और पारदर्शी तंत्र के विधि ढांचे की कमी और ब्लाकों के आवंटन पर लंबित मुकदमों के गतिरोध के कारण अपतटीय ब्लाकों के आवंटन के पिछले प्रयासों के वांछित परिणाम नहीं मिले। ऐसे में यह विधेयक लाया गया है।

इसमें कहा गया कि इसके माध्यम से प्रतियोगी बोली द्वारा केवल नीलामी के माध्यम से निजी क्षेत्रों के लिए उत्पादन पट्टे को प्रदान करने का उपबंध किया गया है।

इसमें केंद्र सरकार द्वारा आरक्षित किए गए खनिज संबंधी क्षेत्रों में सरकार या सरकारी कंपनी या निगम को प्रतियोगी बोली के बिना संक्रिया अधिकार देने का उपबंध किया गया है।

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