देश की खबरें | मुम्बई में स्थानीय लोग लॉकडाउन के दौरान एक सर्कस के लोगों के लिए बड़ा सहारा बने

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पीली और नीली धारियों और झूमते घोड़े वाले हिडोला से लैस यहां रैम्बो सर्कस में कभी बड़ी चहल-पहल थी लेकिन लॉकडाउन के सन्नाटे के चलते सर्कस पर ताला लग गया और घोड़े भी नाचने बंद हो गये। परंतु, अब भी यहां जिंदगी संजीदगी से भरी है।

नवी मुम्बई, 27 जून पीली और नीली धारियों और झूमते घोड़े वाले हिडोला से लैस यहां रैम्बो सर्कस में कभी बड़ी चहल-पहल थी लेकिन लॉकडाउन के सन्नाटे के चलते सर्कस पर ताला लग गया और घोड़े भी नाचने बंद हो गये। परंतु, अब भी यहां जिंदगी संजीदगी से भरी है।

रैम्बो सर्कस के प्रबंधक बीजू नैयर ने कहा कि नवी मुम्बई के एयरोली इलाके में लोगों का मनोरंजन करने के लिए यह सर्कस फरवरी में आया था और यह संकट के इन महीनों के दौरान उसकी मदद करने के लिए यहां के लोगों के प्रति ऋणी है।

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कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए 25 मार्च को लॉकडाउन लगा दिया गया था लेकिन उससे पहले से ही बीमारी के डर से लोगों का आना बंद कर देने के चलते सर्कस के शो बंद हो गये थे।

नैयर ने कहा कि लोगों को धन्यवाद करने के लिए शब्द कम पड़ जाएगा। उनके अनुसार जब वह कलाकारों और तकनीशियनों समेत अपने 90 सदस्यीय दल के साथ यहां आए थे तब वे लोग यहां किसी को नहीं जानते थे। लेकिन वे अब जानने लगे।

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नैयर ने कहा कि कुछ दुकानदारों ने गर्मी के महीनों में सब्जियों की सतत आपूर्ति सुनिश्चित की जबकि कुछ अन्य राशन पहुंचाने लगे। इन महीने के दौरान उन्हें जिंदा रहने में जिन लोगों ने मदद की उनमें एक राकांपा नेता छगन भुजबल थे जिन्होंने खाद्य आपूर्ति में योगदान दिया।

लॉकडाउन से पहले सर्कस महज चार शो ही कर पाया। कुछ महीने बाद हर बार अपना ठिकाना बदल लेने वाला सर्कस फरवरी से यहीं जमा है।

सर्कस के लोग अपने टेंटों में टेलीविजन सेट या मोबाइल से चिपके रहे तथा स्टोवों पर खाना पकाते रहे। बाहर लंबे लंबे घास उग गये हैं। निसर्ग तूफान से उन्हें नुकसान पहुंचा।

नैयर ने कहा, ‘‘ जान तो किसी की नहीं गयी लेकिन चक्रवात से जेनरेटर और कुछ एयरकंडीशनों को नुकसान पहुंचा।’’

उन्होंने कहा कि लेकिन मरम्मत एक बड़ी चुनौती है क्योंकि पैसे तो आ नहीं रहे हैं और कार्य बहाल होने की फिलहाल कोई संभावना नहीं है।

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