देश की खबरें | स्थानीय प्रशासन ने कहा , नेकां का कोई नेता हिरासत में नहीं, पार्टी ने बुलाई बैठक

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय को स्थानीय प्रशासन द्वारा यह सूचित किए जाने के बाद कि नेशनल कांफ्रेस के 16 नेताओं में से कोई भी हिरासत में नहीं है, पार्टी ने बृहस्पतिवार को वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाने का फैसला किया।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

श्रीनगर, 19 अगस्त जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय को स्थानीय प्रशासन द्वारा यह सूचित किए जाने के बाद कि नेशनल कांफ्रेस के 16 नेताओं में से कोई भी हिरासत में नहीं है, पार्टी ने बृहस्पतिवार को वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाने का फैसला किया।

उल्लेखनीय है कि नेकां ने अदालत में दावा किया था कि उसके 16 नेताओं को गैर कानूनी तरीके से बंधक बनाया गया है।

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नेशनल कांफ्रेंस ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि पार्टी के विभिन्न नेताओं को गैर कानूनी नजरबंदी से मुक्त कराने के लिए पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जिसने सरकार के रुख पर संज्ञान लिया है।

बयान में कहा, ‘‘ मामले में दाखिल जवाब के अध्ययन के दौरान पार्टी ने गौर किया कि सरकार ने उच्च न्यायालय में कहा कि कोई नेता हिरासत में नहीं है और जरूरी सुरक्षा उपायों के साथ कहीं भी आने-जाने को स्वतंत्र है।’’

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पार्टी ने कहा, ‘‘ उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत सरकार के रुख पर भरोसा करते हुए कि पार्टी के सदस्य कहीं भी आने जाने के लिए मुक्त हैं, नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने अली मोहम्मद सागर, अब्दुल रहीम राथर, मोहम्मद सफी उरी और नासिर असलम वाणी सहित पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों को 20 अगस्त 2020 को शाम पांच बजे अपने आवास पर आमंत्रित किया है।’’

पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि महामारी की मौजूदा परिस्थितियों पर गौर करते हुए हिरासत में रखे गए विभिन्न नेताओं के साथ चार-चार के दल में बैठक होगी और इस दौरान सभी द्वारा मानक परिचालन प्रक्रिया का कड़ाई से अनुपालन किया जाएगा।

नेशनल काफ्रेंस ने कहा कि उसे उम्मीद है कि हिरासत में रखे गए पार्टी सदस्य वास्तव में आजाद हैं और निर्धारित दिन सफलापूर्वक बैठक होगी।

गौरतलब है कि फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला ने 13 जुलाई को बंदी प्रत्क्षीकरण याचिका दायर की थी और पार्टी के सदस्यों को रिहा कराने का अनुरोध किया था।

इसके जवाब में पिछले महीने अतिरिक्त महा अधिवक्ता बशीर अहमद डार ने कहा कि याचिका का मकसद न केवल आश्चर्यचकित करने वाला बल्कि स्तब्ध करने वाला भी है क्योंकि न तो कोई कानूनी कार्यवाही चल रही है न ही अपेक्षित है। इसी तरह का जवाब कश्मीर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने भी अदालत में दाखिल किया था।

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