देश की खबरें | सीएए विरोधी प्रदर्शन में ‘हिस्सा लेने’ के लिए महिला को हिरासत में रखना कानूनन सही : पुलिस
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली पुलिस ने उच्च न्यायालय से कहा है कि सीएए और एनआरसी के खिलाफ यहां हुए प्रदर्शन के सिलसिले में एक महिला को आतंकवाद निरोधक कानून के तहत गिरफ्तार करने की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका विचार करने योग्य नहीं है क्योंकि वह हमेशा कानून के तहत हिरासत में रही है।
नयी दिल्ली, 30 मई दिल्ली पुलिस ने उच्च न्यायालय से कहा है कि सीएए और एनआरसी के खिलाफ यहां हुए प्रदर्शन के सिलसिले में एक महिला को आतंकवाद निरोधक कानून के तहत गिरफ्तार करने की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका विचार करने योग्य नहीं है क्योंकि वह हमेशा कानून के तहत हिरासत में रही है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ के समक्ष यह हलफनामा केंद्र सरकार के वकील अमित महाजन ने दायर किया। इस मामले में पुलिस का प्रतिनिधित्व करने के लिए उन्हें विशेष वकील नियुक्त किया गया है।
अदालत ने दिल्ली पुलिस के जवाब को संज्ञान में लिया और मामले में सुनवाई की अगली तारीख आठ जून तय की।
दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने 20 मई को हुई सुनवाई में मामले में महाजन को विशेष वकील नियुक्त करने का विरोध किया था और पीठ ने कहा था कि वह 29 मई को मामले की सुनवाई करेगा।
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इसके बाद अदालत ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई की कि मामले में पुलिस का प्रतिनिधित्व कौन करेगा।
मेहरा ने पीठ से कहा कि उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय की तरफ से बनाए गए कानून के मुताबिक उपराज्यपाल विशेष लोक अभियोजक या विशेष वकील नियुक्त कर सकते हैं और वह भी दिल्ली सरकार के मंत्रिपरिषद् के सलाह पर।
अदालत ने महिला के भाई की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई की जिसमें आरोप लगाया गया कि पुलिस ने उसे अवैध रूप से हिरासत में रखा है क्योंकि उसकी हिरासत अवधि बढ़ाने के लिए उसे किसी विशेष न्यायाधीश के समक्ष पेश नहीं किया गया है।
महाजन के मार्फत दायर हलफनामे में पुलिस ने कहा कि महिला को हिरासत में रखा जाना कानूनन सही है क्योंकि उसे हमेशा निचली अदालत में पेश किया गया जिसे उच्च न्यायालय ने लॉकडाउन के दौरान रिमांड आदेश पारित करने के लिए अधिकृत किया है।
महिला को उतरपूर्वी दिल्ली के जाफराबाद में सीएए विरोधी और एनआरसी विरोधी प्रदर्शन में कथित तौर पर हिस्सा लेने के लिए नौ अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था।
उसे 13 मई को जमानत मिल गई लेकिन जेल से रिहा नहीं किया गया और परिवार को पता चला कि कथित तौर पर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए उस पर अवैध गतिविधियां (निवारण) कानून के तहत एक और प्राथमिकी दर्ज की गई है लेकिन एनआईए कानून के तहत उसे विशेष न्यायाधीश के समक्ष पेश करना आवश्यक नहीं है।
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