देश की खबरें | कोविड-19 ने जन स्वास्थ्य के ढांचे पर संरचनात्मक रूप से विचार करने का मौका दिया है : हर्षवर्द्धन
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 17 अगस्त केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्द्धन ने सोमवार को कहा कि कोविड-19 महामारी ने देश के जन स्वास्थ्य ढांचे पर संरचनात्मक रूप से विचार करने का मौका दिया है।

भारतीय उद्योग महासंघ (सीआईआई) के दो दिवसीय डिजिटल जन स्वास्थ्य सम्मेलन के उद्घाटन सत्र पर हर्षवर्द्धन ने उम्मीद जताई कि 2025 तक तपेदिक मुक्त भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लक्ष्य को उद्योग जगत एवं सीआईआई की मदद से हासिल कर लिया जाएगा।

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कार्यक्रम में स्वास्थ्य सुविधाओं पर डिजिटल प्रदर्शनी और ‘सीआईआई टीबी मुक्त कार्यस्थल अभियान’ की शुरुआत की गई और ‘सीआईआई जनस्वास्थ्य रिपोर्ट’ भी जारी की गई। इसमें वर्द्धन के अलावा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे तथा नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. विनोद के. पॉल ने भी हिस्सा लिया।

एक बयान में हर्षवर्द्धन के हवाले से कहा गया, ‘‘इस महामारी ने हमें देश में जन स्वास्थ्य सुविधाओं के ढांचे पर संरचनात्मक रूप से विचार करने का मौका दिया है।’’

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कोरोना वायरस पर लगाम कसने में भारत के सफल रूख का उदाहरण देते हुए उन्होंने सरकार की योजनाओं को बृहद् सामाजिक आंदोलन में बदलने की देश की क्षमता की प्रशंसा की, ‘‘जिससे चेचक और पोलियो का पूरी तरह उन्मूलन हो गया और वह भी उस वक्त जब भारत में पोलियो के मामले दुनिया भर के मामलों में 60 फीसदी तक होते थे।’’

टीबी मुक्त कार्यस्थल अभियान पर हर्षवर्द्धन ने कहा, ‘‘भारत में तपेदिक के 26.4 लाख मामले हैं जो दुनिया भर में टीबी के सर्वाधिक मामलों में है।’’

स्वास्थ्य मंत्री ने विश्वास जताया कि आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से स्वास्थ्य ढांचे में और सुधार आएगा और कालाजार तथा कुष्ठ रोग जैसी बीमारियों का खात्मा हो जाएगा और प्रसव के दौरान महिलाओं की मृत्यु दर शून्य हो जाएगी।

चौबे ने कहा कि जमीनी स्तर तक चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने का प्रधानमंत्री का प्रयास ‘‘ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार का क्रांतिकारी’’ कदम है।

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