देश की खबरें | कोविड-19 ने विभिन्न देशों में सर्वश्रेष्ठ और बदतर प्रतिक्रिया को प्रदर्शित किया : वेंकैया नायडू

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने बुधवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी ने विभिन्न देशों में सर्वश्रेष्ठ और बदतर प्रतिक्रिया को प्रदर्शित किया। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि ज्यादातर देशों ने सहयोगी भावना के साथ प्रतिक्रिया की, जबकि कुछ देश अपने तुच्छ हित साधने में लगे रहे।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, दो दिसंबर उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने बुधवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी ने विभिन्न देशों में सर्वश्रेष्ठ और बदतर प्रतिक्रिया को प्रदर्शित किया। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि ज्यादातर देशों ने सहयोगी भावना के साथ प्रतिक्रिया की, जबकि कुछ देश अपने तुच्छ हित साधने में लगे रहे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि महामारी ने वस्तुत: किसी भी देश को अछूता नहीं छोड़ा और इसका प्रभाव विभिन्न तरीकों से समाज एवं अर्थव्यवस्था पर पड़ा।

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नायडू ने कहा कि भारत अन्य देशों को कोविड-19 स्वास्थ्य आपात स्थिति के दौरान फार्मास्यूटिकल्स जैसी वस्तुओं से मदद करना नहीं भूला।

इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (आईसीडब्लयूए) की संचालन इकाई की 18 वीं बैठक को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए नायडू ने कहा कि भारत महामारी से लड़ने की वैश्विक कोशिशों में अग्रिम पंक्ति से नेतृत्व कर रहा है।

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उन्होंने कहा, ‘‘हम एक टीका विकसित के लिए अनुसंधान करने में जुटे हुए हैं और जल्द ही अच्छी खबर मिलने की उम्मीद है।’’

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक उन्होंने कहा कि महामारी ने विभिन्न देशों में सर्वश्रेष्ठ और बदतर प्रतिक्रिया को प्रदर्शित किया।

नायडू ने बयान में कहा कि ज्यादातर देशों ने सहयोगी भावना के साथ प्रतिक्रिया की, जबकि कुछ देश अपने तुच्छ हितों को साधने में लगे रहे।

हालांकि, उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया।

नायडू ने कई नीति निमार्ताओं और अफ्रीकी देशों के विद्वानों के साथ डिजिटल माध्यमों से हुए दो दिवसीय परामर्श को लेकर संतोष प्रकट किया।

बैठक में विदेश मंत्री एवं आईसीडब्ल्यूए के उपाध्यक्ष एस जयशंकर ने भारतीय विश्वविद्यालयों में ‘एरिया स्टडीज’ के विकास पर नये सिरे से ध्यान देने की अपील की।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विभिन्न देशों की सामाजिक-राजनीतिक, आर्थिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक तथा भौगोलिक क्षेत्रों की मजबूत भारतीय अकादमिक समझ न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मामलों पर ज्ञान सृजित करने के लिए, बल्कि मजबूत नीति निर्माण के लिए भी जरूरी है।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने जयशंकर के विचारों से सहमति प्रकट की और सुझाव दिया कि काउंसिल को नीति आयोग, विदेश मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की एक बैठक बुलानी चाहिए और वह आईसीडब्ल्यूए की आम सभा में या संचालन परिषद की बैठक में एक विशेष रिपोर्ट पेश करे।

कुमार आईसीडब्ल्यूए के एक अन्य उपाध्यक्ष हैं।

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