नयी दिल्ली, 27 मई देश के रसायन उद्योग ने कोविड-19 से बचाव में विषाणुनाशक चैंबर बनाये जाने को लेकर जनता के बीच जागरुकता बढ़ाने का फैसला किया है। रसायन उद्योग और शोध संस्थानों का मानना है कि इस प्रकार के चैंबर बनाकर लोगों पर रसायनों का सीधे छिड़काव करना नुकसानदेह हो सकता है। इसमें सावधानी बरती जानी चाहिये।
एल्कली मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एएमएआई); नेशनल केमिकल लैबोरेटरी (सीएसआईआर-एनसीएल), पुणे और मुंबई के इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (आईसीटी) ने इस प्रकार के विषाणुनाशक (डिसइन्फेक्टेंट) के सुरक्षित प्रयोग को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए एक साथ आने का फैसला किया है।
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उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस महामारी के प्रसार के बीच विषाणुनाशक रसायनों के इस्तेमाल की अहम भूमिका सामने आई है।
संगठनों की ओर से जारी बयान के मुताबिक, कई जगहों पर लोगों ने विषाणुनाशक छिड़काव के लिये बड़े चैंबर तैयार कर लिया है। इन चैंबर में से जैसे ही कोई गुजरता है, इसमें लगी मशीन की मदद से उस पर किटाणुनाशक रसायन का छिड़काव हो जाता है। ऐसा करने से फायदा कम नुकसान ज्यादा हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एडवाइजरी के हवाले से इन संगठनों ने कहा कि सोडियम हाइपोक्लोराइट जैसे डिसइन्फेक्टेंट का प्रयोग किसी सतह को विषाणुरहित करने के लिए होना चाहिए, किसी मनुष्य के लिए नहीं।
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इस विषाणुनाशक में इस्तेमाल होने वाले सोडियम हाइपोक्लोराइट, क्लोरीन, ब्लीचिंग सॉल्यूशन/पाउडर आदि का उत्पादन करने वाले एल्कली उद्योग के प्रतिनिधि संगठन एएमएआई के अध्यक्ष जयंतीभाई पटेल ने कहा, ’वैज्ञानिक शोध में शामिल दो अग्रणी संगठनों का सहयोग मिलना हमारे लिए खुशी की बात है। इन संगठनों ने प्रयोगशाला में अध्ययन के बाद इस तरह के विषाणुनाशक रसायन के सुरक्षित प्रयोग के हमारे विचारों का समर्थन किया है।’
सीएसआईआर-एनसीएल के डायरेक्टर अश्विनी कुमार नांगिया ने कहा, ’डिसइन्फेक्टेंट के तौर पर सोडियम हाइपोक्लोरोइट या ब्लीच या हाइपो का प्रयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए और इन्हें त्वचा पर लगाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है या खुजली हो सकती है। इनके प्रयोग के समय आंखों को भी चश्मे या फेस शील्ड आदि से ढंककर रखना चाहिए।’
आईसीटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर ए. बी. पंडित ने कहा, ’भारतीय मानक ब्यूरो ने घर में प्रयोग के लिए 4 से 6 प्रतिशत कंसंट्रेशन वाले सोडियम हाइपोक्लोराइट को मंजूरी दी है। वाणिज्यिक रूप से मिलने वाले इस कंसंट्रेशन को भी किसी प्रशिक्षित व्यक्ति की निगरानी में पानी मिलाकर डाइल्यूट करना चाहिए, ताकि डिसइन्फेक्शन के लिए उसका प्रयोग किया जा सके।’
डब्ल्यूएचओ ने कहा है, ’किसी सुरंग, कैबिनैट या चैंबर में किसी व्यक्ति पर डिसइन्फेक्टेंट का प्रयोग किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। यह शारीरिक व मानसिक रूप से घातक हो सकता है। ऐसा करने से किसी भी वायरस का शिकार हुए मरीज की संक्रमण फैलाने की क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इस तरह के डिसइन्फेक्शन के बाद भी संक्रमित व्यक्ति के पास जाने या उसके खांसने-छींकने से संक्रमण का खतरा पहले जैसा ही बना रहता है।’
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