बिना अनुमति कोविड-19 मरीजों के लिए नहीं कर सकते माहुल की इमारतों का इस्तेमाल: अदालत
बीएमसी की कई विकास परियोजनाओं से प्रभावित हुए लोगों के पुनर्वास के लिए बनी इन इमारतों को इलाके में बड़े पैमाने पर प्रदूषण के चलते उच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा रिहाइश के लिए अनुपयुक्त घोषित किया गया था।
मुंबई, 15 मई बंबई उच्च न्यायालय ने बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) को शुक्रवार को आदेश दिया कि अदालत की अनुमति के बिना खाली पड़ी इमारतों का प्रयोग कोविड-19 के संदिग्ध मरीजों को पृथक-वास में रखने के लिए न किया जाए।
बीएमसी की कई विकास परियोजनाओं से प्रभावित हुए लोगों के पुनर्वास के लिए बनी इन इमारतों को इलाके में बड़े पैमाने पर प्रदूषण के चलते उच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा रिहाइश के लिए अनुपयुक्त घोषित किया गया था।
बीएमसी ने अदालत को बताया था कि एवरस्माइल परिसर, माहुल परियोजना प्रभावित कॉलोनी में स्थित तीन इमारतों को पृथक-वास केंद्र के रूप में “अंतिम विकल्प” के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति अमजद सैयद की पीठ ने बीएमसी को आदेश दिया कि अदालत की अनुमति के बिना इन इमारतों का इस्तेमाल न किया जाए।
बीएमसी ने अदालत में एक हलफनामा दायर कर कहा था कि उसके आकलन के अनुसार जिस क्षेत्र में माहुल परियोजना स्थित है वहां 30 मई तक कोविड-19 के मामले बढ़कर 2,946 तक पहुंचने की आशंका है।
बीएमसी ने अदालत में कहा था कि कोविड-19 के मरीजों के लिए निर्दिष्ट पृथक-वास केंद्रों का अभाव है इसलिए आवश्यकता पड़ने पर उन्हें माहुल की इमारतों में रखा जा सकता है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, लेटेस्टली स्टाफ ने इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया है)
(The above story first appeared on LatestLY on May 15, 2020 09:45 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

