देश की खबरें | सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों को पूरा करने के लिये और समय की मांग वाली बिहार सरकार की याचिका खरिज

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने गंगा में छोड़े जाने वाले प्रदूषकों के उपचार के आलोक में सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्रों को पूरा करने के लिए समय सीमा बढ़ाने की बिहार सरकार की याचिका खारिज कर दी है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 22 सितंबर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने गंगा में छोड़े जाने वाले प्रदूषकों के उपचार के आलोक में सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्रों को पूरा करने के लिए समय सीमा बढ़ाने की बिहार सरकार की याचिका खारिज कर दी है।

अधिकरण ने कहा कि समय सीमा बढ़ाने का मुख्य कारण कोरोना वायरस संक्रमण बताया गया है, जो केवल छह महीने से है और इसके दृष्टिगत लॉकडाउन तीन महीने तक था ।

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अधिकरण ने कहा कि निश्चित तौर पर कोविड—19 ऐसा विषय है जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है ।

हरित पैनल ने कहा कि यह राज्य और स्थानीय निकाय की जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करें कि जल निकायों में बिना ट्रीटमेंट के सीवेज का बहाव नहीं हो ।

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राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए के गोयल की अगुवाई वाली पीठ ने कहा, 'जल अधिनियम के तहत इस तरह का बहाव एक आपराधिक कृत्य है और यह स्वच्छ वातावरण मुहैया कराने के राज्य के कर्तव्य का उल्लंघन है जो संविधान के अंतर्गत जीवन के अधिकार का हिस्सा है ।'

न्यायमूर्ति गोयल ने कहा कि इस प्रयोजन के लिए धनराशि की व्यवस्था राज्य द्वारा या तो संबंधित नागरिकों से एकत्र करके की जानी चाहिए या अन्य माध्यमों से ।

इसने कहा कि अधिकरण के पास गतिविधियों को अनुमति देने के लिए समय बढ़ाने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है, जो कानून के तहत अपराध है और उच्चतम न्यायालय के आदेशों की अवमानना भी है ।

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