देश की खबरें | ''केरल यदि 100% नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल करे तो पांच साल में नौ हजार करोड़ रुपये बचाएगा''

तिरुवनंतपुरम, नौ जून एक नये अध्ययन के अनुसार यदि केरल 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल करता है तो वह पांच साल में नौ हजार करोड़ रुपये बचा सकता है।

अध्ययन के अनुसार यदि केरल 2040 तक कोयला बिजली खरीद को नवीकरणीय ऊर्जा अनुबंधों से बदल देता है, तो वह पांच साल की अवधि में 9,000 करोड़ रुपये बचा सकता है। इसके अनुसार यदि केरल केंद्रीय क्षेत्र के संयंत्रों से कोयला बिजली की अपनी निर्धारित खरीद को तीन रुपये प्रति यूनिट (किलोवाट प्रतिघंटे) के औसत टैरिफ पर नई नवीकरणीय ऊर्जा से बदल देता है, तो राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 969 करोड़ रुपये की बचत होगी।

अध्ययन में कहा गया है कि रिपोर्ट में एक ऐसे उपाय का भी सुझाव दिया गया है जिसमें 2026-27 तक 1560 मेगावाट कोयला बिजली के इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से कम करके 4,505 करोड़ रुपये की बचत की जा सकती है।

थिंक-टैंक ‘क्लाइमेट रिस्क होराइजन्स’ (सीआरएच) ने ये महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले है।

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने घोषणा की थी कि राज्य अगले 17 वर्षों में 100 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य रखेगा।

एक बयान में कहा गया है कि अंतिम विश्लेषण शुक्रवार को यहां आयोजित ‘केरल के विद्युत क्षेत्र में ऊर्जा परिवर्तन का गोलमेज सम्मेलन’ नामक कार्यक्रम में जारी किया गया।

बिजली विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के. आर. ज्योतिलाल, केरल ऊर्जा प्रबंधन केंद्र (ईएमसी) के अध्यक्ष डीआर आरवीजी मेनन और केरल राज्य विद्युत बोर्ड के अन्य सदस्यों ने कार्यक्रम में भाग लिया।

बयान में कहा गया है कि अक्षय ऊर्जा के साथ सभी कोयला बिजली अनुबंधों को बदलने से राज्य बिजली की कम लागत के जरिये सालाना अनुमानित 1,843 करोड़ रुपये बचा सकता है।

राज्य के ऊर्जा सचिव के. आर. ज्योतिलाल ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि केरल अपनी दैनिक जरूरतों के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर अपनी बिजली का लगभग 70 प्रतिशत आयात करता है।

उन्होंने कहा, ‘‘अब यह निर्भरता की स्थिति से स्वतंत्रता की ओर बढ़ने का समय है। हमारे पास राज्य के भीतर हरित ऊर्जा पैदा करने और भारत में हरित ऊर्जा निर्यात केंद्र बनने की क्षमता है।’’

उन्होंने कहा कि बदलाव का यह अभियान स्थानीय शासी निकायों से शुरू होना चाहिए।

ज्योतिलाल ने कहा, ‘‘हम राज्य में पवन ऊर्जा का इस्तेमाल करने और बिजली बनाने, कचरे को ऊर्जा में परिवर्तित करने और हाइड्रोजन का निर्यात करने के लिए भी तैयार हैं।’’

अधिकारी ने कहा कि सरकार निवासियों को अपनी ऊर्जा का उत्पादन करने और इसे इस तरह से बेचने में सक्षम बनाना चाहती है जिससे खरीदार और विक्रेता दोनों को लाभ हो। उन्होंने कहा, ‘‘हम हरित और सतत ऊर्जा में लोगों को कुशल बनाने और राज्य के लिए रोजगार और निवेश के अवसर पैदा करने के इच्छुक हैं।’’

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