तिरुवनंतपुरम, 18 जून केरल में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने रविवार को दावा किया कि केरल वामपंथ विरोधी मीडिया का केंद्र है जो दक्षिणपंथी विचारधारा वाली शाखा के विचारों को गढ़ने में शामिल है और दुनिया में ऐसा कहीं नहीं देखा गया है।
माकपा की केरल इकाई के सचिव एम. वी. गोविंदन ने यह टिप्पणी प्रमुख मलयालम चैनल की एक महिला पत्रकार पर साजिश-सह-मानहानि के मामले में मुकदमा दर्ज किए जाने के संबंध में अपनी हालिया टिप्पणी के स्पष्टीकरण में की।
स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के प्रदेश सचिव पी. एम. अर्शो के कथित फर्जी परीक्षा परिणाम के संबंध में पत्रकार के खिलाफ यह पुलिस कार्रवाई की गई।
यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में गोविंदन ने दावा किया कि उनकी टिप्पणियों की गलत व्याख्या की गई और उन्होंने यह नहीं कहा था कि मीडिया को राज्य में वामपंथी सरकार या माकपा की छात्र शाखा एसएफआई के खिलाफ रिपोर्ट के लिए कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने जो कहा था वह यह था कि खबर बनाने के लिए इस तरह की साजिशों में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा। कानून सभी के लिए समान रूप से लागू होता है, यहां तक कि पत्रकारों पर भी। रिपोर्टिंग पर कोई रोक नहीं है, लेकिन मौजूदा मामले में यह रिपोर्टिंग नहीं थी।’’
माकपा के प्रदेश सचिव ने कहा कि केरल में मीडिया गलत तरीके से उनके बयान को प्रसारित करने और इसे फैलाने के लिए जिम्मेदार था।
गोविंदन ने आरोप लगाया, ‘‘ऐसा दुनिया में और कहीं नहीं होता, सिर्फ यहीं होता है। केवल केरल में आप इस तरह के कम्युनिस्ट विरोधी रुख और बहुसंख्यक मीडिया द्वारा दक्षिणपंथी समर्थक विचारों का निर्माण होते देखते हैं। ज्यादातर मीडिया हमारे खिलाफ है। मैं कहना चाहता हूं कि केरल उस मीडिया का केंद्र है जो वामपंथ विरोधी है और दक्षिणपंथी विचारों का निर्माण करता है।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY