देश की खबरें | केरल उच्च न्यायालय ने लाइफ मिशन परियोजना में अनियमितताओं की सीबीआई जांच पर लगाई रोक
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कोच्चि, 13 अक्टूबर केरल उच्च न्यायालय ने बेघर लोगों के लिए मकान मुहैया कराने वाली राज्य सरकार की आवासीय परियोजना ‘लाइफ मिशन’ में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच पर मंगलवार को दो महीने की रोक लगा दी।
न्यायमूर्ति वी जी अरुण ने केरल सरकार की याचिका की सुनवाई के दौरान जांच पर दो महीने की रोक लगाने को मंजूरी दी। सरकार ने सीबीआई द्वारा दायर प्राथमिकी को खारिज किए जाने का अनुरोध किया था। सीबीआई ने लाइफ मिशन को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के कथित उल्लंघन के मामले में नामजद किया है।
हालांकि, अदालत ने केंद्रीय एजेंसी को मामले के संबंध में एक निजी निर्माण कंपनी के खिलाफ जांच जारी रखने की अनुमति दे दी।
लाइफ मिशन ने दलील दी कि कथित एफसीआरए उल्लंघन के तहत सीबीआई की जांच जारी नहीं रखी जा सकती। अदालत ने इस दलील पर विचार करते हुए आंशिक रूप से रोक लगाने पर मंजूरी दे दी।
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सीबीआई ने कांग्रेस विधायक अनिल अक्कारा की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी और एफसीआरए की धारा 35 के तहत कोच्चि की एक अदालत में एक याचिका दायर की थी। इसमें कोच्चि स्थित यूनीटेक बिल्डर के प्रबंध निदेशक संतोष एप्पन को पहला आरोपी और साने वेंचर्स को दूसरा आरोपी बनाया गया था।
एप्पन ने भी लाइफ मिशन घोटाले में अपने खिलाफ सीबीआई द्वारा दर्ज मामले को खारिज किए जाने का अनुरोध करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
लाइफ मिशन के सीईओ यू वी जोस ने अपनी याचिका में कहा कि यह प्राथमिकी, ‘‘अवैध, मनमाने तरीके से काम करने वाली और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने वाली है, इसलिए इसे खारिज किया जाना चाहिए।’’
राज्य विधि मंत्री ए के बालन ने उच्च न्यायालय के आदेश पर कहा कि परियोजना को एफसीआरए के सभी प्रावधानों को लागू किए जाने से छूट मिल गई है।
हालांकि अनिल अक्कारा ने कहा कि अदालत ने सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी रद्द नहीं की हैं। सरकार ने पिछले सप्ताह दलील दी थी कि राज्य सतर्कता जांच के लंबित रहने के दौरान सीबीआई के हाथ में जांच सौंपने से राज्य के संघीय ढांचे को चोट पहुंचेगी।
परियोजना में विदेशी अंशदान (विनियमन) कानून (एफसीआरए) का कथित उल्लंघन और भ्रष्टाचार केरल में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। विपक्ष के नेता रमेश चेन्नीथला ने आरोप लगाया है कि सोना तस्करी मामले में मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश ने एनआईए की अदालत के सामने स्वीकार किया कि उसे परियोजना से एक करोड़ रुपये का कमीशन मिला ।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि रेड क्रिसेंट द्वारा ठेकेदार के चयन में भ्रष्टाचार हुआ है ।
अंतरराष्ट्रीय संगठन रेड क्रिसेंट ने लाइफ मिशन परियोजना के लिए 20 करोड़ रुपये का कोष मुहैया कराने पर सहमति जतायी थी।
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