तिरुवनंतपुरम, 11 मई केरल में एक दिन पहले एक युवा चिकित्सक की हत्या से उपजे चौतरफा विरोध प्रदर्शन के बीच प्रदेश सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह राज्य में स्वास्थ्य कर्मियों एवं अस्पतालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आलोक में कानून में संशोधन के लिए एक अध्यादेश जारी करेगी। प्रदेश के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने इसकी जानकारी दी।
प्रदेश के कोल्लम जिले के एक अस्पताल में पुलिस द्वारा उपचार के लिए लाए गए एक व्यक्ति ने बुधवार को 23 वर्षीय चिकित्सक वंदना दास की चाकू गोद कर हत्या किये जाने के बाद चिकित्सकों ने बृहस्पतिवार को अपना विरोध प्रदर्शन और तेज कर दिया तथा दिवंगत चिकित्सक को न्याय दिलाने की मांग की ।
इसके बाद, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने एक उच्च स्तरीय आपात बैठक बुलायी और अस्पताल सुरक्षा कानून में संशोधन के लिये अध्यादेश लाने की घोषणा की ।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केरल स्वास्थ्य देखभाल सेवा (हिंसा और संपत्ति को नुकसान की रोकथाम) अधिनियम 2012 में संशोधन के लिए एक अध्यादेश कैबिनेट की अगली बैठक में पेश किया जायेगा ।
बयान में कहा गया है कि अध्यादेश जारी करने के अलावा राज्य के प्रमुख अस्पतालों में पुलिस चौकी भी स्थापित की जाएगी।
बैठक में प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज, मुख्य सचिव वी पी जॉय, स्वास्थ्य, कानून, चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिवों, प्रदेश पुलिस प्रमुख, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशकों और कई अन्य अधिकारियों ने इस बैठक में हिस्सा लिया ।
इससे पहले केरल उच्च न्यायालय ने मरीज द्वारा चाकू गोद कर डॉक्टर की हत्या को ‘‘व्यवस्थागत नाकामी’’ का नतीजा करार दिया और कहा कि इसे इक्का-दुक्का मामले की तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रदेश सरकार का फैसला उच्च न्यायालय के इस टिप्पणी के बाद आया है ।
गौरतलब है कि कोट्टायम जिले की रहने वाली वंदना दास अजीजिया मेडिकल कालेज अस्पताल में हाउस सर्जन के पद पर तैनात थी, जो उनके प्रशिक्षण का हिस्सा था । उन्हें मरीज ने कई बार चाकुओं से गोद दिया जिसके बाद उन्होंने दम तोड़ दिया था। वंदना हमालवर मरीज का उपचार कर रही थी ।
इससे पहले दिन में केरल उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को हत्या किए जाने की घटना को ‘‘व्यवस्थागत नाकामी’’ का नतीजा करार दिया और कहा कि इसे इक्का दुक्का मामले की तरह अनदेखा नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन और न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ की एक विशेष पीठ ने राज्य के पुलिस प्रमुख को निर्देश दिया कि वह ‘‘यह सुनिश्चित करें कि कानूनी रूप से संभव तरीके से सभी अस्पतालों को सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि आगे हमले की इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।’’
अदालत ने कहा कि जहां तक घटना का प्रश्न है, ‘‘इसमें कोई संदेह नहीं कि हिरासत में एक व्यक्ति द्वारा एक डॉक्टर की हत्या - एक आरोपी के रूप में या किसी अन्य क्षमता में - दृढ़ता से व्यवस्थागत नाकामी की ओर इंगित करती है।’’
अदालत ने कहा कि यह एक जघन्य घटना है जिसे कभी नहीं होनी चाहिये थी ।
इसने कहा कि जैसा कि ताजा मामला है, इस तरह के एक और हमले को सही ठहराने के लिए प्रोटोकॉल की कमी को इसका कारण नहीं बनाया जा सकता है।
अदालत ने कहा कि जिस तरह से आरोपी स्कूल शिक्षक जी संदीप को उपचार के लिए तालुक अस्पताल में लाया गया, वह हादसा होने के लिए काफी था और यह एक ‘‘चमत्कार’’ ही था कि उसने इलाज करने वाली नर्सों पर हमला नहीं किया ।
पीठ ने राज्य पुलिस प्रमुख को केरल में सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों तथा अन्य स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नए प्रोटोकॉल बनाने का निर्देश दिया है।
पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘‘पुलिस को युद्ध स्तर पर कमर कसनी होगी।’’
अदालत ने कहा कि अगर किसी और डॉक्टर या स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर पर हमला किया जाता है तो राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य पुलिस प्रमुख अनिल कांत और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) एम आर अजित कुमार ने पीठ से कहा कि वे एक सप्ताह के भीतर नए प्रोटोकॉल बनाएंगे।
उन्होंने अदालत में यह भी कहा कि राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल (एसआईएसएफ) के पास पुलिस विभाग से चयनित युवा, सशस्त्र और प्रशिक्षित कर्मी हैं तथा वे भुगतान के आधार पर अस्पतालों में तैनाती के लिए उपलब्ध हैं।
बहरहाल, राज्य सरकार को यह फैसला करना होगा कि क्या वह सरकारी अस्पतालों में इन कर्मियों की तैनाती के लिए बिल का भुगतान करेगी।
राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने यह भी माना कि यह घटना व्यवस्थागत विफलता थी और घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों को युवा डॉक्टर वंदना दास की रक्षा करनी चाहिए थी।
केरल के कोल्लम जिले में कोट्टारक्कारा के एक तालुक अस्पताल में इलाज के लिए लाए गए एक निलंबित स्कूल शिक्षक जी. संदीप ने बुधवार को उसके घाव की मरहम-पट्टी कर रही 23 वर्षीय एक महिला डॉक्टर पर कथित रूप से सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले ब्लेड से हमला कर उसकी हत्या कर दी थी।
पुलिस आरोपी व्यक्ति को परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट में घायल होने के बाद अस्पताल ले कर आई थी।
पुलिस ने बताया कि घाव की मरहम-पट्टी कराने के दौरान संदीप हिंसक हो गया। उसने शुरु में स्थानीय नेता और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों पर वार किया और फिर डॉ वंदना दास पर लगातार वार करता गया जो अपने आप को बचा नहीं पायीं।
हमले में गंभीर रूप से घायल हुई डॉ वंदना दास की घटना के कुछ घंटों बाद मौत हो गयी।
इससे पहले, केरल गवर्नमेंट मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (केजीएमओए) ने राज्य सरकार को अस्पतालों और डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कई उपाय सुझाए।
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में, केजीएमओए ने हत्या के मद्देनजर सरकार द्वारा तत्काल विचार के लिए उपायों की एक सूची पेश की।
सुझावों में, स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केरल स्वास्थ्य देखभाल सेवा (हिंसा और संपत्ति को नुकसान की रोकथाम) अधिनियम 2012 में संशोधन के लिए एक अध्यादेश जारी करना शामिल है।
संगठन ने सीसीटीवी कैमरे लगाने और पूर्व सैनिकों की तैनाती करने का भी सुझाव दिया है ।
बाद में शाम को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में सरकारी अस्पतालों को तीन श्रेणियों में बांटकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का फैसला किया गया। पहली श्रेणी में मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सामान्य अस्पताल और महिला एवं बच्चों का अस्पताल शामिल हैं जहां पुलिस चौकियां स्थापित की जाएंगी।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में दो अन्य श्रेणियों के अस्पतालों के बारे में विवरण का उल्लेख नहीं था।
सीएमओ के बयान में कहा गया है कि पुलिस चौकियों के अलावा, सभी तीन श्रेणियों के अस्पतालों में व्यापक पुलिस निगरानी, सीसीटीवी कैमरे और चेतावनी प्रणाली होनी चाहिए ताकि ऐसी स्थिति पैदा हो सके जहां डॉक्टर एवं अन्य स्वास्थ्य पेशेवर सुरक्षित रूप से काम कर सकें।
इससे पहले, मुख्यमंत्री की प्रस्तावित अध्यादेश की घोषणा के बाद केजीएमओए ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया ।
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