कोच्चि, 10 जून विपक्षी नेताओं के एक वर्ग के विरोध के बावजूद केरल सरकार ने त्रिशूर जिले में पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील चालक्कुडी नदी बेसिन में प्रस्तावित विवादास्पद अथिरापिल्ली जल विद्युत परियोजना पर फिर से आगे बढ़ने का निर्णय लिया है।
राज्य सरकार ने केरल राज्य विद्युत बोर्ड (केएसईबी) के अधिकारियों के उस पत्र पर गौर किया जिसमें परियोजना पर आगे बढ़ने और नए सिरे से पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त करने की बात कही गई थी। राज्य सरकार ने गत चार जून को सात वर्ष की अवधि के लिए 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' जारी किया और अथिरापिल्ली जलविद्युत परियोजना के कार्यान्वयन पर आगे बढ़ने की अनुमति दी।
सरकार ने परियोजना पर आगे बढ़ने की अनुमति तब दी जब परियोजना के डेवलपर केएसईबी ने उससे यह कहते हुए संपर्क किया कि परियोजना के लिए पहले प्राप्त पर्यावरणीय मंजूरी और तकनीकी-आर्थिक मंजूरी सहित वैधानिक मंजूरी की तारीखें समाप्त हो गई हैं।
पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश, केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्नितला और भाकपा के राज्यसभा सदस्य एवं राज्य के पूर्व वन मंत्री बी. विश्वम ने राज्य सरकार के फैसले की आलोचना की।
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जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए चेतावनी दी कि यदि वाम सरकार अथिरापिल्ली परियोजना पर आगे बढ़ी तो केरल में ‘साइलेंट वैली’ को लेकर 1970 के दशक में हुए विरोध प्रदर्शन जैसा आंदोलन हो सकता है। साइलेंट वैली पालक्कड़ जिले में सदाबहार उष्णकटिबंधीय वन है।
रमेश ने कई ट्वीट करके कहा कि उन्होंने तत्कालीन संप्रग सरकार में पर्यावरण मंत्री रहते हुए केरल में सरकार में और बाहर में विभिन्न लोगों से परामर्श करने के बाद 2010 के शुरुआत में अथिरापिल्ली परियोजना पर रोक लगा दी थी।
उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘मैंने व्यक्तिगत रूप से भी क्षेत्र का दौरा किया था। यह अत्याचारपूर्ण है कि एलडीएफ इस परियोजना पर फिर से आगे बढ़ रही है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने सोचा था कि 2018 की बाढ़ आपदा के बाद एलडीएफ को कुछ पर्यावरणीय समझ होगी। लेकिन स्पष्ट रूप से मेरी सोच गलत थी। इस परियोजना से व्यापक पारिस्थितिकी क्षति पहुंचेगी।’’
चेन्नितला ने घोषणा की कि कांग्रेस नीत यूडीएफ राज्य सरकार को परियोजना को लागू नहीं करने देगा। चेन्नितला ने तिरुवनंतपुरम में एक विरोध प्रदर्शन में कहा, ‘‘हम सरकार को परियोजना लागू नहीं करने देंगे।’’
भाकपा नेता बी. विश्वम ने कहा कि इस परियोजना को राज्य में लागू नहीं किया जाएगा क्योंकि इसे बंद करने का निर्णय पूर्व में सत्तारूढ़ एलडीएफ द्वारा लिया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘निर्णय नौकरशाही के स्तर पर लिया गया है। वे एलडीएफ की संस्कृति नहीं जानते। परियोजना से पर्यावरणीय नुकसान होगा और यह आर्थिक रूप से भी अव्यावहारिक है।’’
163 मेगावाट की स्थापित क्षमता वाली प्रस्तावित अथिरापिल्ली जल विद्युत परियोजना त्रिशूर जिले में चलक्कुडी नदी बेसिन में स्थित है।
कांग्रेस नीत पूर्ववर्ती यूडीएफ और माकपा नीत पूर्ववर्ती एलडीएफ सरकारों ने भी इसकी मंजूरी के लिए दबाव डाला था लेकिन पर्यावरणविद् तथा रमेश और विश्वम जैसे कुछ नेताओं ने इसका कड़ा विरोध किया था।
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