देश की खबरें | केरल सीएमओ ने बिना अनुमति फोन टैप करने की रिपोर्ट खारिज की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के कार्यालय ने व्यापक आलोचनाओं के बीच शुकव्रार को मीडिया की उन खबरों को ‘‘निराधार’’ बताते हुए खारिज कर दिया, जिसमें संगठित अपराधों की जांच के लिए संबंधित प्राधिकारी की अनुमति की प्रतीक्षा किए बिना पुलिस को किसी भी संचार की टोह लेने की स्वीकृति देने वाला एक मसौदा विधेयक सरकार के समक्ष विचाराधीन होने का दावा किया गया था।

तिरुवनंतपुरम, 10 सितंबर केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के कार्यालय ने व्यापक आलोचनाओं के बीच शुकव्रार को मीडिया की उन खबरों को ‘‘निराधार’’ बताते हुए खारिज कर दिया, जिसमें संगठित अपराधों की जांच के लिए संबंधित प्राधिकारी की अनुमति की प्रतीक्षा किए बिना पुलिस को किसी भी संचार की टोह लेने की स्वीकृति देने वाला एक मसौदा विधेयक सरकार के समक्ष विचाराधीन होने का दावा किया गया था।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा, ‘‘ इस संबंध में सरकार के समक्ष ऐसी कोई फाइल नहीं है। इस संबंध में सभी खबरें निराधार हैं।’’

मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा कि संगठित अपराधों पर लगाम लगाने के लिए एक प्रभावी कानून बनाने के सुझाव विभिन्न हलकों से आए हैं और इस संबंध में प्राप्त प्रस्तावों की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति भी नियुक्त की गई है। मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), कानून सचिव और पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता केके रवींद्रनाथ सरकार द्वारा नियुक्त पैनल के सदस्य हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान में निहित नागरिकों के अधिकारों पर वाम सरकार की ओर से कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। सरकार द्वारा ऐसा कोई भी प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाएगा।

खबरों के अनुसार, विवादास्पद मसौदा विधेयक में प्रस्ताव है कि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) रैंक का एक अधिकारी किसी जांच अधिकारी को किसी संगठित अपराध पर अंकुश लगाने के लिए आपात स्थिति के दौरान तार, इलेक्ट्रॉनिक या मौखिक संचार को इंटरसेप्ट करने की आधिकारिक अनुमति दे सकता है। वहीं, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक पैनल जल्द ही इस विधेयक पर गौर करेगा।

इस बीच, विपक्षी कांग्रेस ने कथित मसौदा विधेयक को लेकर माकपा नीत एलडीएफ सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने ट्वीट किया कि विधेयक ‘‘असंवैधानिक’’ है।

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