देश की खबरें | कर्नाटक के नए शिक्षा मंत्री ने पाठ्यपुस्तकों में संशोधन का संकेत दिया

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बेंगलुरु, 30 मई कर्नाटक के नवनियुक्त प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा ने छात्रों के हित में और यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनका दिमाग ‘‘दूषित’’ नहीं हो, आने वाले दिनों में स्कूली पाठ्यपुस्तकों में संशोधन का मंगलवार को संकेत दिया।

उन्होंने हिजाब पर प्रतिबंध को पलटने के संबंध में किसी तरह की टिप्पणी से परहेज करते हुए कहा कि यह मामला अदालत के समक्ष है। उन्होंने लोगों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को खत्म करने के बारे में नयी सरकार की योजनाओं का इंतजार करने को कहा।

कांग्रेस ने अपने चुनाव घोषणापत्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में रहने के दौरान स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में किए गए बदलावों को पूर्ववत करने और एनईपी को भी खत्म करने का वादा किया था। बंगारप्पा ने कहा, ‘‘मैं कांग्रेस की घोषणापत्र समिति का उपाध्यक्ष था और घोषणापत्र में हमने स्पष्ट रूप से कहा था कि छात्रों के भविष्य के हित में पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा होगी। हम नहीं चाहते कि उनका दिमाग दूषित हो।’’

संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘‘हम पहले ही कह चुके हैं कि छात्र शिक्षा प्राप्त करने के लिए स्कूल जाते हैं और हम नहीं चाहते कि इसमें गड़बड़ी हो और इसमें सरकार या मेरी या अधिकारियों या व्यवस्था की ओर से कोई गलती नहीं होनी चाहिए। हमने प्रतिबद्धता दी है।’’

कल से स्कूल शुरू करने के लिए पाठ्यपुस्तकें भेज दी गई हैं, इसका उल्लेख करते हुए बंगारप्पा ने कहा, ‘‘अब हमारे सामने चुनौती है कि हम छात्रों और उनकी पढ़ाई को प्रभावित किए बिना इसे सावधानी से किस तरह करें।’’

बंगारप्पा ने कहा कि घोषणापत्र में की गई प्रतिबद्धता को मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाया जाएगा।

मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने सोमवार को कहा था कि पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से बच्चों के दिमाग को दूषित करने के कृत्य को माफ नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा था, ‘‘शैक्षणिक वर्ष शुरू हो गया है, हम चर्चा करेंगे और कार्रवाई करेंगे ताकि बच्चों की शिक्षा प्रभावित नहीं हो।’’

मुख्यमंत्री ने कहा था कि एनईपी के नाम पर शिक्षा क्षेत्र को ‘‘घालमेल का शिकार’’ नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि इस संबंध में अलग बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें इस पर व्यापक चर्चा की जाएगी और सख्त फैसले लिए जाएंगे।

पिछली सरकार के दौरान पाठ्यपुस्तक पर विवाद गहरा गया था, जब कांग्रेस और कुछ लेखकों ने तत्कालीन पाठ्यपुस्तक समीक्षा समिति के प्रमुख रोहित चक्रतीर्थ को बर्खास्त करने की मांग की थी।

आरोप लगे थे कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के भाषण को एक अध्याय के रूप में शामिल करके स्कूल की पाठ्यपुस्तकों का ‘‘भगवाकरण’’ किया गया, और स्वतंत्रता सेनानियों, समाज सुधारकों, और प्रसिद्ध साहित्यकारों पर आधारित अध्यायों को हटा दिया गया। बारहवीं शताब्दी के समाज सुधारक बासवन्ना पर गलत सामग्री के भी आरोप लगे थे।

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