देश की खबरें | कर्नाटक राज्यसभा चुनाव सर्वसम्मति से होने की संभावना, भाजपा ने कम चर्चित चेहरे मैदान में उतारे

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कर्नाटक से चार राज्यसभा सीटों के लिए 19 जून को होने वाले चुनाव के सर्वसम्मति से होने की संभावना है क्योंकि किसी भी पार्टी ने कोई अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा है। चुनाव में कांग्रेस और जद (एस) ने जहां दिग्गज उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं तो वहीं भाजपा ने ‘‘कम जाने पहचाने’’ कार्यकर्ताओं को अपना उम्मीदवार बनाया है।

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बेंगलुरु, आठ जून कर्नाटक से चार राज्यसभा सीटों के लिए 19 जून को होने वाले चुनाव के सर्वसम्मति से होने की संभावना है क्योंकि किसी भी पार्टी ने कोई अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा है। चुनाव में कांग्रेस और जद (एस) ने जहां दिग्गज उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं तो वहीं भाजपा ने ‘‘कम जाने पहचाने’’ कार्यकर्ताओं को अपना उम्मीदवार बनाया है।

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने सोमवार को प्रदेश इकाई की सिफारिशों की अनदेखी करते हुए राज्यसभा चुनाव के लिए एरन्ना कडाडी और अशोक गस्ती को उम्मीदवार बनाकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया।

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वहीं, कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को उम्मीदवार बनाया है।

इसके साथ ही, जद (एस) ने घोषणा की कि उसने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कई राष्ट्रीय नेताओं और पार्टी विधायकों के आग्रह पर अपने संरक्षक एवं पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा को राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाने का निर्णय किया है।

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कर्नाटक से राज्यसभा की चार सीटों के लिए 19 जून को चुनाव होना है जो कांग्रेस के राजीव गौड़ा और बी के हरिप्रसाद, भाजपा के प्रभाकर कोरे और जद (एस) के डी कुपेंद्र रेड्डी की 25 जून को सेवानिवृत्ति के साथ रिक्त हो जाएंगी।

नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तारीख नौ जून है।

विधानसभा में अध्यक्ष सहित भाजपा के 117 विधायक हैं जो दो सीटों पर आसान जीत सुनिश्चित कर सकते हैं।

विधानसभा में कांग्रेस के 68 विधायक हैं और यह चार सीटों में से एक सीट पर अपने खुद के दम पर आसानी से जीत सकती है।

जद (एस) के संरक्षक एवं पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा राज्यसभा चुनाव में अपनी पार्टी के उम्मीदवार हैं। विधानसभा में उनकी पार्टी के 34 विधायक हैं और वह अपने दम पर राज्यसभा की एक भी सीट जीतने में सक्षम नहीं है। पार्टी को इसके लिए कांग्रेस की, इसके अतिरिक्त मतों के साथ, सहायता की आवश्यकता होगी।

उम्मीदवारों को जीत के लिए कम से कम 45 मतों की आवश्यकता है।

किसी पार्टी द्वारा अतिरिक्त उम्मीदवार खड़ा न किए जाने से उम्मीदवार विधानसभा में अपनी पार्टी के विधायकों की संख्या के आधार पर जीत सकते हैं। इस तरह चुनाव के सर्वसम्मति से होने की संभावना है।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा, ‘‘अब तक केवल कांग्रेस के उम्मीदवार ने नामांकन पत्र दाखिल किया है, अन्य के कल नामांकन पत्र भरने की उम्मीद है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘राजनीतिक दलों द्वारा घोषित चार उम्मीदवारों के अलावा यदि कोई अतिरिक्त उम्मीदवार नामांकन पत्र दाखिल नहीं करता है तो यह निर्विरोध, सर्वसम्मत चुनाव होगा और मतदान नहीं होगा।’’

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने आज जब एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीवारों के रूप में एरन्ना कडाडी और अशोक गस्ती के नामों की घोषणा की तो पार्टी के गलियारों में इसने हर किसी को आश्चर्यचकित कर दिया क्योंकि इसने प्रदेश इकाई की सिफारिशों को खारिज कर दिया।

पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेश भाजपा की कोर कमेटी ने शनिवार को आलाकमान को तीन नामों की सिफारिश की थी जिनमें वरिष्ठ विधायक उमेश कट्टी के भाई रमेश कट्टी, प्रभाकर कोरे और अग्रणी होटल व्यवसायी प्रकाश शेट्टी शामिल थे।

प्रदेश इकाई की सिफारिश वाले नामों को खारिज करते हुए कम जाने-पहचाने कार्यकर्ताओं-कडाडी और गस्ती के नामों की घोषणा उम्मीदवारों के रूप में की गई जो पार्टी संगठन से लंबे समय से जुड़े रहे हैं।

लिंगायत समुदाय से ताल्लुक रखने वाले कडाडी पार्टी की बेलगावी इकाई के प्रभारी हैं। वहीं, गस्ती सविता समाज (नाई समुदाय) से हैं और रायचूर जिले से ताल्लुक रखते हैं। वह पार्टी की बेल्लारी इकाई के प्रभारी हैं।

दोनों कार्यकर्ता अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पृष्ठभूमि से हैं और उन्होंने दशकों तक पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काम किया है।

भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि निर्णय से कार्यकर्ता ‘‘खुश’’ हैं क्योंकि यह जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को मान्यता है।

उन्होंने कहा, ‘‘इससे पार्टी की प्रदेश इकाई पूरी तरह आश्चर्यचकित रह गई और निश्चित तौर पर इससे इसके नेतृत्व को स्पष्ट संदेश मिलता है।’’

नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद खड़गे ने संवाददाताओं के साथ बातचीत में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व का धन्यवाद व्यक्त किया तथा कहा कि वह उनकी उम्मीदों को पूरा करने के लिए ईमानदारी से कोशिश करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं विधायकों से अपील करता हूं कि यदि मतदान होता है तो वे मेरा समर्थन करें।’’

अजेय नेता के रूप में जाने जाते रहे खड़गे को अपने राजनीतिक करियर में पहली बार 2019 के लोकसभा चुनाव में गुलबर्गा से भाजपा के उमेश जाधव से 95,452 मतों से हार का सामना करना पड़ा।

नौ बार विधायक और दो बार लोकसभा सदस्य रहे 77 वर्षीय खड़गे पूर्ववर्ती लोकसभा में कांग्रेस के सदन के नेता थे। संप्रग सरकार के दौरान वह रेल और श्रम मंत्री भी रह चुके हैं।

वह कर्नाटक में कांग्रेस सरकारों के दौरान भी मंत्री रह चुके हैं। विगत में वह कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और कर्नाटक विधानसभा में नेता विपक्ष भी रहे हैं।

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