बेंगलुरु, 13 सितंबर कर्नाटक पुलिस ने अल्पसंख्यकों के लिए राज्य सरकार की वाणिज्यिक वाहन रियायत योजना के बारे में गलत जानकारी देने के आरोप में एक हिंदी समाचार चैनल और उसके सलाहकार संपादक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि कर्नाटक अल्पसंख्यक विकास निगम (केएमडीसी) के सहायक प्रशासक शिवकुमार की शिकायत पर यहां शेषाद्रिपुरम थाने में चैनल और इसके सलाहकार संपादक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 505 (शरारतपूर्ण बयान) 153 ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
शिकायतकर्ता ने सलाहकार संपादक पर निगम की योजना के बारे में झूठी खबर फैलाने और राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
‘आजतक’ चैनल के सलाहकार संपादक सुधीर चौधरी ने प्राथमिकी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह अदालत में लड़ाई के लिए तैयार हैं।
उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “कर्नाटक में कांग्रेस सरकार द्वारा मेरे खिलाफ प्राथमिकी की जानकारी मिली। सवाल का जवाब एफआईआर? वो भी गैर-जमानती धाराओँ के साथ। यानी गिरफ्तारी की पूरी तैयारी। मेरा सवाल यह था कि स्वावलंबी सारथी योजना में हिंदू समुदाय शामिल क्यों नहीं है? इस लड़ाई के लिए मैं भी तैयार हूं। अब अदालत में मिलेंगे।”
प्राथमिकी के मुताबिक, 11 सितंबर को एक समाचार कार्यक्रम में सलाहकार संपादक ने दावा किया कि कर्नाटक सरकार ऐसी योजना चला रही है जिसका लाभ केवल अल्पसंख्यकों को मिलता है, गैर-अल्पसंख्यक हिंदुओं को नहीं और वह राज्य में अल्पसंख्यक तुष्टिकरण कर रही है। साथ ही उन्होंने यह दावा भी किया कि इससे हिंदुओं के साथ अन्याय हो रहा है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया, ''इस तरह की खबरें प्रकाशित करके हिंदुओं और अन्य धर्मों के बीच नफरत फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। यह अशांति का माहौल बनाने और सांप्रदायिक दंगे भड़काने का भी प्रयास है। वह जो बात कह रहे हैं, उससे पूरी तरह वाकिफ होने के बावजूद ऐसी खबरें प्रकाशित कर वह राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश रच रहे हैं।”
केएमडीसी ने भी एक बयान जारी कर योजना की व्याख्या की और आरोप लगाया कि चैनल ने खबर को "तोड़ मरोड़कर" पेश किया।
बयान के अनुसार, केएमडीसी बेरोजगार युवाओं को स्व-रोजगार के लिए ऑटोरिक्शा, सामान और टैक्सी खरीदने के लिए 50 प्रतिशत या तीन लाख रुपये तक की सब्सिडी दे रहा है। इसके अलावा देवराज उर्स विकास निगम, डॉक्टर बी. आर. आंबेडकर विकास निगम, वाल्मिकी विकास निगम और आदि जनभाव विकास निगम ने भी ऐसी योजनाएं लागू की हैं।
बयान में कहा गया है, "ये योजनाएं न केवल अल्पसंख्यक समुदाय के लिए बल्कि पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए भी हैं। यह हिंदू समुदाय के बेरोजगार युवाओं के लिए भी उपलब्ध हैं। ये योजनाएं मौजूदा कांग्रेस सरकार ने नहीं बल्कि पिछली भाजपा सरकार ने लागू की थी।”
शिकायत में आरोप लगाया गया है, "लेकिन समाचार चैनल ने इस खबर को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हुए कहा कि यह केवल सामान्य रूप से अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से मुसलमानों के लिए है, जिससे हिंदुओं के साथ अन्याय हुआ। यह खबर झूठी और दुर्भावनापूर्ण है। इसका उद्देश्य समाज में सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काना है।”
समाचार रिपोर्ट प्रसारित होने के बाद, कर्नाटक के सूचना प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियंक खरगे ने मंगलवार को आरोप लगाया कि एंकर जानबूझकर सरकारी योजनाओं के बारे में गलत सूचना फैला रहा था।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियंक ने ‘एक्स’ पर लिखा, “आजतक का एंकर जानबूझकर सरकारी योजनाओं के बारे में गलत सूचना फैला रहा है, जिसे सबसे पहले भाजपा सांसदों ने शुरू किया था और मीडिया का एक वर्ग इसे आगे बढ़ा रहा है। यह जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से किया है, सरकार आवश्यक कानूनी कार्रवाई करेगी।”
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