नयी दिल्ली, 15 जून कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कर्ण सिंह ने नेपाली संसद में विवादित नक्शा से जुड़ा विधेयक पारित होने को लेकर सोमवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि गंभीर कूटनीतिक खामी प्रतीत होती है।
गौरतलब है कि नेपाल की संसद ने शनिवार को देश के राजनीतिक नक्शे को संशोधित करने से जुड़े एक विधेयक को पारित करते हुए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा इलाकों पर दावा किया। भारत दशकों से इन क्षेत्रों को अपना मानता रहा है।
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सिंह ने एक बयान में कहा, ‘‘कई दशकों तक नेपाल के साथ राजनीतिक एवं सामाजिक रूप से जुड़े रहने के तौर पर मुझे गहरा अफसोस और पीड़ा है कि प्रधानमंत्री ओली अपने देश को ऐसी स्थिति में लेकर चले गए है जहां टकराव का माहौल है, जबकि दोनों देशों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक और राजनीतिक संबंध सदियों पुराने हैं।’’
जम्मू-कश्मीर के पूर्व ‘सद्र-ए-रियासत’ ने कहा, ‘‘इसका भारत पर कोई असर पड़े या नहीं, लेकिन मुझे इस बात का डर है कि नेपाल के लिए असर अनुकूल नहीं होगा।’’
वर्ष 2006 में नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता के समय कर्ण सिंह को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन द्वारा विशेष दूत के तौर पर नेपाल भेजा गया था ताकि सभी नेपाली राजनीतिक पक्षों से सुलह का आग्रह किया जाए।
सिंह ने कहा कि भारत को कभी स्थिति को इतना बिगड़ने नहीं देना चाहिए था।
उनके मुताबिक पिछले साल नवंबर में जब नेपाल ने विवादित नक्शे से जुड़े मुद्दा उठाया तो भारत को तत्काल विदेश सचिव स्तर की वार्ता आरंभ करनी चाहिए थी और जरूरी होने पर यह विषय विदेश मंत्री या प्रधानमंत्री के स्तर पर भी उठाया जाता।
सिंह ने कहा, ‘‘प्रथम दृष्टया, ऐसा लगता है कि गंभीर कूटनीतिक खामी हुई है जिसका नतीजे हम सबके सामने हैं।’’
हक
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