नयी दिल्ली, चार जनवरी भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी. वाई. चंद्रचूड़ ने बुधवार को कहा कि सेवानिवृत्त हो रहे न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर हमेशा सच के साथ खड़े रहे और यह सुनिश्चित किया कि लोगों को न्याय मिले।
सीजेआई ने न्यायमूर्ति नजीर के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने (निवर्तमान न्यायाधीश ने) कभी भी तनाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।
न्यायमूर्ति नजीर न्यायालय की परम्पराओं के अनुरूप अपने अंतिम कार्यदिवस को सीजेआई और न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा के साथ रस्मी पीठ में शामिल है।
न्यायमूर्त चंद्रचूड़ ने कहा, "न्यायमूर्ति नज़ीर वैसे न्यायाधीश नहीं हैं, जो सही और गलत के बीच तटस्थ रहेंगे, बल्कि वह सच को तलाशेंगे और इसके लिए खड़े होंगे तथा न्याय सुनिश्चित करेंगे। दुर्भाग्यवश, मैं उनके समक्ष (वकील के तौर पर) पेश नहीं हो सका, लेकिन अयोध्या मामले की सुनवाई में मैं उनके साथ पीठ में शामिल था और मैंने महसूस किया कि उनका व्यक्तित्व कितना बड़ा है। मैं आज शाम सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित विदाई समारोह के लिए अपनी महत्वपूर्ण टिप्पणियों को संजोकर रख रहा हूं।"
सीजेआई ने कहा कि क्रिकेट के मैदान पर एक परंपरा है कि क्रिकेट टीम का कप्तान हमेशा उस दिन मैदान पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले अपने खिलाड़ी को पवेलियन लौटते वक्त टीम की अगुवाई करने की अनुमति देता है।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, "उस परंपरा की पृष्ठभूमि में मैं न्यायमूर्ति नज़ीर से अनुरोध करूंगा कि वह हमें ‘पवेलियन’ (कक्षों) तक जाने में हमारी अगुवाई करें।"
न्यायमूर्ति नजीर ने कहा कि उन्होंने शीर्ष अदालत में एक न्यायाधीश के रूप में लगभग छह साल बिताए और अपने आखिरी कार्यदिवस को भावुक हो रहे हैं।
न्यायमूर्ति नज़ीर ने कहा, "मैं थोड़ा भावुक महसूस कर रहा हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद। लगभग छह साल हो गए हैं, एक महीना ही कम है। मैंने यहां हर पल का आनंद लिया है। आप सभी ने मेरा समर्थन किया है, मुझे प्रोत्साहित किया है और मुझे सिखाया है।"
न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने भी न्यायमूर्ति नजीर के साथ काम का अपना अनुभव साझा किया।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि न्यायमूर्ति नजीर का चेहरा हमेशा मुस्कुराता रहता था और उनकी यह छाप हमेशा बनी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि न्यायमूर्ति नजीर ने बार के साथ हमेशा बेहद शालीनता बरती और उन्होंने अदालत कक्ष में हमेशा सुखद माहौल बनाए रखा।
न्यायमूर्ति नज़ीर का जन्म पांच जनवरी, 1958 को हुआ था और उन्होंने 18 फरवरी, 1983 को वकालत पेशे की शुरुआत की थी।
उन्होंने कर्नाटक उच्च न्यायालय में वकालत किया और 12 मई, 2003 को कर्नाटक उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किये गये। बाद में उन्हें 24 सितंबर, 2004 को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
न्यायमूर्ति नज़ीर को 17 फरवरी, 2017 को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था।
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