नयी दिल्ली, सात अगस्त उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश सुधांशु धूलिया ने उस मामले की सुनवाई से सोमवार को खुद को अलग कर लिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने हल्द्वानी में रेलवे के दावे वाले 29 एकड़ भूमि पर से अतिक्रमण हटाने के उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर पूर्व में रोक लगा दी थी।
यह विषय न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति धूलिया की पीठ के समक्ष सुनवाईके लिए आया ।
न्यायमूर्ति धुलिया के सुनवाई से अलग होने का बिना कोई कारण बताये पीठ ने कहा, ‘‘एक ऐसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए जिसमें हममें से एक (न्यायमूर्ति धूलिया) नहीं हों।’’
शीर्ष न्यायालय ने दो मई को कहा था कि उच्च न्यायालय के 20 दिसंबर 2022 के निर्देश पर रोक लगाने संबंधी उसका आदेश इसके (पीठ के) समक्ष अपील लंबित रहने के दौरान जारी रहेगा।
शीर्ष न्यायालय ने 29 एकड़ भूमि से अतिक्रमण हटाने संबंधी उच्च न्यायालय के निर्देश पर पांच जनवरी को रोक लगाते हुए इसे एक मानवीय मुद्दा बताया था और कहा कि रातोंरात 50,000 लोगों का घर नहीं उजाड़ा जा सकता।
रेलवे के मुताबिक, भूमि पर 4,365 अतिक्रमणकारी हैं। वहां रह रहे लोगों ने पूर्व में हल्द्वानी में प्रदर्शन कर कहा था कि वे भूमि के वाजिब मालिक हैं। विवादित भूमि पर करीब 50,000 लोग रह रहे हैं जिनमें से ज्यादातर मुस्लिम हैं।
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