रांची, 27 अगस्त इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की झारखंड शाखा ने रविवार को मांग की कि राज्य सरकार चिकित्सकों और मरीजों के लाभ के लिए झारखंड में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट (एमपीए) और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) में जल्द से जल्द संशोधन करें।
आईएमए ने यहां अपनी कार्यकारी निकाय की बैठक के दौरान इस संदर्भ में सरकार से अनुरोध करने का फैसला किया और कहा कि इस पर अमल ना करने पर वे नया आंदोलन शुरू कर सकते हैं।
झारखंड शाखा के आईएमए अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने बताया कि राज्य सरकार के पास उनकी मांगें अभी भी लंबित पड़ी हुई हैं।
उन्होंने कहा,''हमें सिर्फ आश्वासन दिया गया है और अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सरकार ने हमारी बहुत समय से लंबित पड़ी मांगों को लेकर उदासीन रवैया अपना लिया है जो स्वीकार्य नहीं है।''
सिंह ने बताया कि जब कई आंदोलनों से दबाव बनाया गया तो राज्य सरकार विधानसभा में बजट सत्र के दौरान एमपीए बिल ले आई।
सिंह ने कहा,''कुछ विधायकों की आपत्ति के बाद इसे प्रवर समिति को भेज दिया गया और ये अगले पांच महीनों के लिए फिर लंबित हो गया।''
सीईए में संशोधन पर झारखंड आईएमए के सचिव प्रदीप कुमार ने कहा, "हमने सिर्फ क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में एक नियम में संशोधन की मांग की है। इसे विधानसभा से पारित किए बिना संशोधित किया जा सकता है लेकिन सरकार इससे अनजान है।"
उन्होंने कहा कि उनकी एकल चिकित्सक क्लीनिक, दंपति चिकित्सक क्लीनिक और 50 बिस्तरों से नीचे के अस्पतालों को सीईए के दायरे से बाहर रखने की मांग है।
कुमार ने कहा,''अगर तुरंत संशोधन नहीं किया गया तो एकल चिकित्सक क्लीनिक, दंपति चिकित्सक क्लीनिक और 50 बिस्तरों से नीचे के अस्पतालों को मजबूरन बंद करना पड़ेगा।''
झारखंड आईएमए अध्यक्ष ने कहा,''अगर सरकार कोई कदम नहीं उठाती है तो हमारे पास आंदोलन को शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा जिससे मरीजों को परेशानी होगी और हम ऐसा नहीं चाहते हैं।''
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