देश की खबरें | जेएसएमडीसी को खदान आरक्षित करने के झारखंड सरकार के फैसले से राजस्व का होगा भारी नुकसान: भाजपा सांसद
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने केंद्रीय खनन मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र लिखकर झारखंड सरकार द्वारा लौह अयस्क खदानों को झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (जेएसएमडीसी) के लिए आरक्षित किए जाने के फैसले को जनहित और राष्ट्रीय खनन नीति के खिलाफ बताया और दावा किया कि इससे 40 हजार करोड़ से अधिक के राजस्व का नुकसान होगा।
नयी दिल्ली, पांच सितम्बर भाजपा सांसद निशिकांत दूबे ने केंद्रीय खनन मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र लिखकर झारखंड सरकार द्वारा लौह अयस्क खदानों को झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (जेएसएमडीसी) के लिए आरक्षित किए जाने के फैसले को जनहित और राष्ट्रीय खनन नीति के खिलाफ बताया और दावा किया कि इससे 40 हजार करोड़ से अधिक के राजस्व का नुकसान होगा।
राज्य की झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) पर निशाना साधते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि इस प्रस्तावित कदम से प्रदेश सरकार को कुछ भी राजस्व नहीं मिलने वाला है। उनके मुताबिक इस फैसले से निवेशकों में भी गलत संदेश गया है।
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जेएसएमडीसी राज्य सरकार का उपक्रम है और इसके लिए खदानों को आरक्षित करने के फैसले का केद्रीय खनन मंत्रालय का अनुमोदन आवश्यक है।
केंद्रीय मंत्री को लिखे पत्र में झारखंड के गोड्डा से सांसद दूबे ने कहा, ‘‘खदानों को जेएसएमडीसी के लिए आरक्षित किए जाने से राज्य सरकार को भारी नुकसान होगा। प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी के इस नए युग में इन सात खदानों की नीलामी से राज्य सरकार को प्रीमियम के रूप में अच्छा खासा राजस्व मिल सकता था। जेएसएमडीसी लौह अयस्क खनन के लिए कोई प्रीमियम नहीं देगी।’’
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झारखंड सरकार ने पिछले दिनों सात लौह अयस्क खदानों को जेएसएमडीसी के लिए आरक्षित किये जाने के फैसला किया था।
दूबे ने कहा कि सात खदानों की नई व्यवस्था के तहत नीलामी होती और जेएसएमडीसी के लिए आरक्षित नहीं किया गया होता तो प्रदेश सरकार को प्रीमियम के रूप में अच्छा खासा राजस्व मिलता। उन्होंने अनुमान लगाया कि इससे 50 साल की अवधि में 40 हजार करोड़ से अधिक का नुकसान होगा।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार का फैसला जनहित के खिलाफ है। यह संसाधनों का उचित और न्यायसंगत बंटवारा भी नहीं है।
जेएसएमडीसी के पिछले कार्य-निष्पादन के रिकार्ड का हवाला देते हुए दूबे ने दावा किया कि कोयला मंत्रालय ने उसे 10 से अधिक कोयले के ब्लॉक आवंटित किए थे लेकिन वह एक भी ब्लॉक विकसित नहीं कर सकी। बहुत सारे कोयला ब्लॉक उसे वापस करने पड़े।
ब्रजेन्द्र
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